पद्म भूषण डॉ अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर कब्जे का गंभीर आरोप, सेटेलाइट इमेज से हुआ खुलासा

रैबार डेस्क: पर्यावरणविद और हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी इन दिनों विवादों... The post पद्म भूषण डॉ अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर कब्जे का आरोप, सेटेलाइट इमेज का दिया हवाला appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jan 21, 2026 - 00:27
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पद्म भूषण डॉ अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर कब्जे का गंभीर आरोप, सेटेलाइट इमेज से हुआ खुलासा
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पद्म भूषण डॉ अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर कब्जे का गंभीर आरोप

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कम शब्दों में कहें तो, पर्यावरणविद और हेस्को के संस्थापक, डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पर आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में विवाद और तकनीकी साक्ष्यों का उल्लेख कर एक नया मोड़ आया है।

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यावरणविद और पद्मभूषण अवार्ड से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी इन दिनों गंभीर विवादों में घिरे हुए हैं। हाल ही में कांग्रेस नेता और अधिवक्ता संदीप मोहन चमोली ने एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए डॉ. जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा करने का आरोप लगाया है। चमोली का कहना है कि डॉ. जोशी ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक पहुंच का दुरुपयोग करते हुए सरकारी वन संपदा को नुकसान पहुँचाया है।

आरोपों में तकनीकी साक्ष्य

संदीप चमोली ने अपने आरोपों को सच्चाई साबित करने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया है। उन्होंने इसरो और गूगल अर्थ की सेटेलाइट इमेजरी का हवाला देते हुए दावा किया है कि डॉ. जोशी ने आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण कर रखा है। इन डिजिटल प्रमाणों के आधार पर अब वन विभाग और प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

Setellite image related to forest land

वन भूमि अतिक्रमण का गंभीर मुद्दा

उत्तराखंड में वन भूमि अतिक्रमण एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। इस पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी कीमत पर वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त किया जाए। ऐसी स्थिति में डॉ. जोशी पर लगे आरोपों ने प्रशासन को एक धर्मसंकट में डाल दिया है।

आगे की कार्रवाई और प्रशासन का रुख

हालांकि, इस समय तक पुलिस या वन विभाग की ओर से डॉ. जोशी के खिलाफ किसी अहम कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस मामले में प्रशासन का रुख देखना दिलचस्प होगा। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, यह संभावना है कि आगामी कुछ दिनों में न्यायालय या प्रशासन की ओर से कार्रवाई का अनुमान लगाया जा सकता है।

वरिष्ठ पर्यावरण विदों और समिति के सदस्यों ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल एक व्यक्ति की साख पर सवाल उठाएगा, बल्कि उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चल रहे संस्थानों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में लाएगा। अधिक अपडेट के लिए यहाँ देखें।

इस मामले की गहराई को समझने के लिए और इसमें शामिल सभी पक्षों को सुनना आवश्यक है। हम इस पर नज़र रखेंगे और आगे की घटनाओं के बारे में आपके साथ अपडेट करते रहेंगे।

कुछ समय पहले तक, डॉ. जोशी की छवि एक कुशल पर्यावरणविद के रूप में स्थापित थी। अब, यह विवाद उनके कार्यों पर क्या प्रभाव डालेगा, यह समय ही बताएगा।

टीम इंडिया टुडे - रिया Sharma

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