प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य का अपमान, प्रशासन ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

प्रयागराज। माघ मेले के दौरान रथ रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर स्वयं को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” लिख रहे हैं। यह …

Jan 20, 2026 - 18:27
 50  501822
प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य का अपमान, प्रशासन ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
प्रयागराज। माघ मेले के दौरान रथ रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्व

प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य का अपमान, प्रशासन ने भेजा नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday

कम शब्दों में कहें तो, माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन द्वारा अपमानजनक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उन्हें 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।

प्रयागराज में माघ मेला इस बार भी विवाद का केंद्र बन गया है। रथ रोकने के विरोध में धरने पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने नोटिस भेजा है। नोटिस में पूछा गया है कि वे "ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य" होने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं। प्रशासन का यह कदम इस बार संगम तट पर हो रहे आयोजनों के दृष्टिगत अत्यंत गंभीर माना जा रहा है।

नोटिस की प्रक्रिया

यह नोटिस माघ मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वारा जारी किया गया है। सोमवार को रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार शंकराचार्य के शिविर पहुंचे, लेकिन रात का समय होने के कारण शिष्यों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। इसके बाद, मंगलवार सुबह कानूनगो ने फिर से शिविर पहुंचकर नोटिस को शिविर के गेट पर चस्पा कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी वासुदेवानंद के बीच विवाद अभी न्यायालय में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि तब तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता और न ही किसी प्रकार का पट्टाभिषेक किया जा सकता है। इस मामले में अब तक कोई नया आदेश पारित नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

नोटिस में यह भी आगे कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में लगे एक बोर्ड पर स्वयं को "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" दर्शाया है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है। इसलिए, उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब

इससे पहले सोमवार को, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि शंकराचार्य वह होता है जिसे अन्य पीठें मानती हैं। उन्होंने दावा किया कि दो पीठें उन्हें शंकराचार्य मानती हैं, और वे पिछले माघ मेले में अन्य शंकराचार्यों के साथ संगम स्नान कर चुके हैं। इस संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि कोई प्रशासनिक या संवैधानिक अधिकारी यह तय नहीं कर सकता कि शंकराचार्य कौन होगा।

धरने पर बैठे शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि जब तक प्रशासन उनसे माफी नहीं मांगता, वे आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन शिविर में नहीं, बल्कि फुटपाथ पर रहेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने धरना स्थल पर पूजा-पाठ भी किया।

सुरक्षा कारणों से रथ रोका गया

मौनी अमावस्या के दिन, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम स्नान के दौरान पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रोका था। इसमें शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में शंकराचार्य धरने पर बैठ गए थे, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी।

क्या होगा आगे?

इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेला प्राधिकरण और ज्योतिषपीठ के बीच मुद्दों को और अधिक जटिल बना दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को किस प्रकार से सुलझाता है और क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने संयम पर कायम रहेंगे या नहीं।

अधिक जानकारी के लिए, अधिक अपडेट्स पर जाने के लिए यहां क्लिक करें.

Team India Twoday - पूजा शर्मा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow