बीकेटीसी मीडिया प्रभारी की माता के निधन पर शोक व्यक्त किया पत्रकारों और संगठनों ने
देहरादून : श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ की माता धूमा देवी गौड़ (83 वर्ष) के निधन से शोक की लहर है। उनका 8 अप्रैल बुधवार अपराह्न देहरादून में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका उपचार कैलाश अस्पताल में चल रहा था। …
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी की माता के निधन पर शोक व्यक्त किया पत्रकारों और संगठनों ने
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कम शब्दों में कहें तो, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ की माता धूमा देवी गौड़ का निधन एक गहरी शोक की लहर लेकर आया है।
देहरादून : श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ की माता, 83 वर्षीय धूमा देवी गौड़ का 8 अप्रैल बुधवार अपराह्न को देहरादून में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और उनका उपचार कैलाश अस्पताल में चल रहा था। इस दुखद समाचार ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि संपादकीय और मीडिया जगत में भी शोक की लहर पैदा कर दी है।
अंतिम संस्कार का आयोजन
धूमा देवी गौड़ का अंतिम संस्कार 9 अप्रैल, गुरुवार को हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर संपन्न हुआ। इस दौरान उनके बड़े पुत्र एनपी गौड़, डॉ. हरीश गौड़ और छोटे पुत्र मोहन गौड़ के साथ परिवार के अन्य सदस्य, बीकेटीसी के अधिकारी-कर्मचारी, पत्रकार और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। यह दृश्य उनके समर्पण, सरलता और सामाजिक योगदान को दर्शाता है।
धूमा देवी गौड़ का जीवन
बीकेटीसी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट ने धूमा देवी गौड़ को एक कर्मठ, धर्मपरायण और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाली महिला के तौर पर याद किया। वे अपने पैतृक गांव पाली (चमोली) में पर्यावरण संरक्षण, कृषि, बागवानी और वृक्षारोपण जैसे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं। पिछले कुछ वर्षों से, वे देहरादून के अपर तुनवाला क्षेत्र में अपने छोटे पुत्र मोहन गौड़, जो कि शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, के साथ रह रही थीं।
शोक संदेशों की बौछार
धूमा देवी के निधन पर बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी आचार्य स्वयंबर सेमवाल और अन्य बीकेटीसी अधिकारियों और कर्मचारी, पत्रकारों तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि देशभर से पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और परिचितों ने शोक संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की है, जिसके लिए उन्होंने सभी का आभार प्रकट किया। यह घटनाक्रम दिखाता है कि पत्रकारिता और समाज सेवा में कैसे व्यक्तिगत संबंध गहरे होते हैं और जब कोई कठिनाई आती है तो हर कोई एकजुट होने के लिए तैयार रहता है।
निष्कर्ष
धूमा देवी गौड़ का निधन एक ऐसे समय में हुआ है जब समाज को ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता है जो समाज, पर्यावरण और मानवता के उत्थान के लिए अपने प्रयासों में जुटे रहें। उनकी याद और योगदान हमारे साथ हमेशा रहेगा।
फिर से एक बार, हम इस कठिन समय में डॉ. हरीश गौड़ और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ प्रकट करते हैं। इस तरह के क्षण हमें एकजुटता और सहानुभूति की भावना से भर देते हैं।
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Team India Twoday
नेहा शर्मा
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