मोबाइल की लत से बचाने के लिए बच्चों को डराने का वीडियो हुआ वायरल, शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

खटीमा। बच्चों को मोबाइल फोन की लत से दूर रखने के लिए एक निजी स्कूल में कराई गई कथित जागरूकता गतिविधि का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में एक बच्चे की आंखों पर पट्टी बांधकर उसे यह कहते हुए दिखाया गया है कि अधिक …

Sep 23, 2026 - 18:27
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मोबाइल की लत से बचाने के लिए बच्चों को डराने का वीडियो हुआ वायरल, शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
खटीमा। बच्चों को मोबाइल फोन की लत से दूर रखने के लिए एक निजी स्कूल में कराई गई कथित जागरूकता गतिवि

मोबाइल की लत से बचाने के लिए बच्चों को डराने का वीडियो हुआ वायरल

कम शब्दों में कहें तो एक निजी स्कूल में बच्चों को मोबाइल फोन की लत से दूर रखने के लिए किए गए जागरूकता कार्यक्रम का वीडियो वायरल हो गया है, जो बच्चों की आंखों पर पट्टी बांधने को लेकर चिंता का विषय बन गया है। शिक्षा विभाग ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। अधिक अपडेट के लिए यहाँ क्लिक करें.

खटीमा। हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए एक विवादास्पद गतिविधि दिखाई गई है। वीडियो में एक बच्चे की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है और उसे यह कहते हुए दिखाया गया है कि "बहुत अधिक मोबाइल चलाने के कारण डॉक्टर ने उसकी आंखें निकाल दीं।" इस भयावह जानकारी को सुनकर वहां मौजूद अन्य बच्चे भी रोने और घबराने लगे। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग ने तुरंत इस मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है।

स्कूल की जागरूकता गतिविधि

इस घटना के अनुसार, खटीमा के एक निजी स्कूल ने बच्चों के मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल, स्मार्टफोन, ऑनलाइन गेमिंग, और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता अभियान आयोजित किया था। शिक्षकों का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के संभावित नुकसान के बारे में बताना था। इस कार्यक्रम में बच्चो के साथ व्यवहार करने के जो तरीके अपनाए गए, वे अब चर्चा का विषय बन गए हैं।

वायरल वीडियो की संवेदनशीलता

वीडियो में एक बच्चे की आंखों पर पट्टी बांधने के साथ ही यह कहा गया कि अधिक मोबाइल फोन चलाने की वजह से उसकी आंखें डॉक्टर ने निकाल दीं। बच्चों के बीच इसे सुनकर कई बच्चे भयभीत और आंसू से भरे नजर आए। बच्चों की यह प्रतिक्रिया इस बात की ओर इशारा करती है कि जागरूकता के नाम पर किए गए इस प्रकार के उपाय बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

एक वायरल वीडियो के एक हिस्से में शिक्षिका बच्चों को मोबाइल चलाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जबकि कई बच्चे मोबाइल फोन का उपयोग न करने की कसमें खा रहे हैं। इससे बच्चों में आंतरिक संघर्ष उत्पन्न होता है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद परिजनों और विशेषज्ञों ने इस प्रकार की गतिविधियों पर कठोर सवाल उठाए हैं।

जागरूकता के तरीके पर उठे सवाल

मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के समय में बच्चों में स्क्रीन टाइम को कम करना अभिभावकों और शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौतियों में से एक है। इस घटना ने यह स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को बच्चों की भावनात्मक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। इस संदर्भ में खटीमा के इस स्कूल का यह तरीका विचारणीय है।

बच्चों को प्रभावी ढंग से जागरूक करने में उनकी मानसिक स्वच्छता और आयु का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, स्कूल के प्रतिवेदन में इस गतिविधि के आयोजित होने के कारणों और प्रक्रियाओं के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही इस मामले की वास्तविकता सामने आएगी।

शिक्षा अधिकारियों की प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर ऊधम सिंह नगर के मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने खटीमा के खंड शिक्षा अधिकारी को तत्काल जांच का निर्देश दिया है। उन्होंने यह कहा कि इस वायरल वीडियो और संबंधित मामले की पूरी और निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जांच अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाएगा कि उक्त गतिविधि किस उद्देश्य से आयोजित की गई और क्या बच्चों के प्रति अपनाई गई प्रक्रिया मानक के अनुरूप थी।

अन्य उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता

शिक्षा विभाग द्वारा इस गतिविधि की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि क्या कोई नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसके अलावा, इस घटना ने यह भी प्रमाणित किया है कि शिक्षकों को बच्चों के साथ काम करते समय अधिक संवेदनशीलता और विवेक का पालन करना चाहिए।

जागरूकता कार्यक्रमों के लिए सकारात्मक और प्रोत्साहक तरीके अपनाने की आवश्यकता है, ताकि बच्चे बिना भय के मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों को समझ सकें। इन गतिविधियों को प्रभावशाली और समय-समय पर अपडेट किया जाना चाहिए जिससे बच्चों की आत्मनिर्भरता बढ़े और वे स्वस्थ जीवन जी सकें।

फिलहाल, वायरल वीडियो के कारण यह विषय चर्चा में बना हुआ है और आगे की कार्यवाही जांच के आधार पर की जाएगी।

टीम इंडिया टुडे, Anita Kumari

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