लखनऊ में जेवर न मिलने पर बुजुर्ग ने लगाई फांसी:इंडियन ओवरसीज बैंक में कटे थे 45 लॉकर, घटना के बाद से परेशान थे
लखनऊ के चिनहट स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के लॉकर तोड़कर चोरी का शिकार हुए 73 साल के बुजुर्ग कुलदीप राज ने फांसी लगा ली। बैंक के लॉकल में उनका करीब 22 लाख रुपए पड़ा था। बेटे ने बताया कि जीवन के मेहनत की कमाई जाने के बाद से गुमशुम रहने लगे थे। मंगलवार को जिम्मेदारियों की लेट लीफीफी के चलते बुजुर्ग ने फांसी लगा ली। आनंद विहार कालोनी चिनहट निवासी विकास ने बताया पिता एचएएल से रिटायर हुए थे। दो साल पहले पत्नी की मौत हो गई। तब से अकेला महसूस करने लगे। विकास अपने परिवार के साथ दिल्ली गए थे। मंगलवार रात जब वापस लौटे तो कमरे में पिता का शव फंदे पर लटका था। उन्हें फंदे से उतार कर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। लॉकर तोड़कर चोरी होने के बाद से गुमशुम रहने लगे विकास ने बताय 21 दिसंबर को चोरों ने आईओबी बैंक में सेंधमारी कर 42 लॉकर काट दिए थे। वारदात के बाद पुलिस ने गिरोह में शामिल दो बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया था, जबकि पांच को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस की कार्रवाई से पिता काफी खुश थे। उन्हें उम्मीद थी कि अब जल्द ही जेवर हाथ लग जाएंगे। लेकिन रिलीज कराने की प्रक्रिया इतनी कठिक हुई कि पैसे मिलने से पहले फंदे के सहारे लटककर आत्महत्या कर ली। खुद को जिम्मेदार ठहराया पीड़ित ने बताया कि सुबह-शाम थान व बैंक के चक्कर काट रहे हैं। संबंधित अधकारी से भी मिले। जेवर वापसी की गुहार लगा रहे थे इसके बाद भी नहीं वापस हुए। इंस्पेकटर चिनहट भरत पाठक ने बताया कि सुसाइडनोट में कुलदीप ने खुद को जिस्मेदार ठहराया है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कोई आरोप नहीं लगाया है। परिवारीजन अगर कोई तहरीर देंगे तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिक जांच में पता चला है कि उन्होंने बीमारी के कारण आत्महत्या की है। सारी जानकारी देने के बाद हुई लेट तलीफी से थे परेशान विकास ने बताया पिता ने पुलिस की मांग पर उन्हें और बैंक को जेवरों की सूची भी दे दी थी। कुछ जेवरों के बिल और फोटो दी थी। पिता लगातार अधिवक्ता के भी संपर्क में थे। एक वकील ने पिता को बताया था कि कोर्ट की कार्रवाई के बाद भी जेवर वापस होंगे। बिना उसके जेवर नहीं मिलेंगे। इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने मामले की चार्जशीट दाखिल कर दी है। बदमाशों के पास से बरामद जेवरों को ट्रेजरी में जमा करा दिया गया था। लोगों को कोर्ट से जेवर लेने के लिए सूची देनी थी। मिलान के बाद लॉकर धारकों को जेवर कोर्ट से रिलीज होंगे।

लखनऊ में जेवर न मिलने पर बुजुर्ग ने लगाई फांसी
लखनऊ से एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ एक बुजुर्ग ने अपने गले में फांसी का फंदा डालकर आत्महत्या कर ली। बुजुर्ग की यह आत्महत्या उस समय हुई जब उन्हें अपने जेवर नहीं मिले। जानकारी के अनुसार, भारतीय ओवरसीज बैंक में उनके 45 लॉकर कटवाए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप वह व्यवहार परिवर्तन का सामना कर रहे थे।
घटना का विवरण
इस घटना ने सभी को हिला कर रख दिया है। बुजुर्ग पहले से ही मानसिक तनाव में थे क्योंकि वे अपने कीमती सामान की चिंता कर रहे थे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से खासा परेशान थे। उन्हें अपने लॉकर से कोई भी सामान नहीं मिला, जो उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
बैंक में लॉकर कटने का मामला
भले ही लॉकर कटने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बैंक में सुरक्षा कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। परिवार का आरोप है कि बैंक प्रबंधन को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इस घटना के बाद से कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब बैंक में लॉकर की सुरक्षा की जा रही है या नहीं।
समाज पर प्रभाव
इस प्रकार की घटनाएँ समाज में एक गंभीर समस्या को उजागर करती हैं। बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ गई है, और इस प्रकार के घटनाओं का समाज पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। हमें न केवल बुजुर्गों की भलाई की चिंता करनी चाहिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
क्या किया जा सकता है?
इस घटना के बाद समाज के हर वर्ग को आगे बढ़कर इस मुद्दे का समाधान निकालना होगा। सामुदायिक कार्यक्रमों की ऊर्जा को बढ़ाना और बुजुर्गों के लिए विशेष सहायता सेवाएं शुरू करना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, बैंक प्रबंधन को भी उचित कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।
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