वनाग्नि की रोकथाम में मुख्य सचिव की महत्वपूर्ण बैठक, प्रिडिक्शन मॉडल बनाने के आदेश
देहरादून : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में वनाग्नि की रोकथाम को लेकर सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक कर महत्त्वपूर्ण दिशानिर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव ने जंगलों में लगने वाली आग के लिए अधिकारियों को प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए हैं। फॉरेस्ट फायर की रोकथाम को लेकर मुख्य सचिव ने […] The post फॉरेस्ट फायर की रोकथाम को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक, प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के दिए निर्देश first appeared on Vision 2020 News.
वनाग्नि की रोकथाम में मुख्य सचिव की महत्वपूर्ण बैठक
देहरादून : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में वनाग्नि की रोकथाम संबंधी एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में विभिन्न विभागों के साथ वनाग्नि से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को जंगलों में लगने वाली आग को नियंत्रित करने के लिए प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
कम शब्दों में कहें तो: मुख्य सचिव ने फॉरेस्ट फायर की रोकथाम के लिए प्रिडिक्शन मॉडल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे नुकसान कम किया जा सके। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
फॉरेस्ट फायर की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले कदम
इस बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि वनाग्नि से संबंधित सभी समितियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ अनिवार्य रूप से बैठकें आयोजित की जाएंगी। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी व्यवस्थाएँ जनवरी माह तक पूरी हो जाएं ताकि फायर सीजन में कोई समस्या न आए। मुख्य सचिव ने प्रदेश भर में फायर हाइड्रेंट्स के लिए डेडिकेटेड प्रेशर पाइपलाइन बनाने का निर्देश भी दिया। इसके लिए पेयजल विभाग को शीघ्र ही प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
प्रिडिक्शन मॉडल बनाने की आवश्यकता
मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देश दिए कि वे विभिन्न प्रकार की वनाग्नि की रोकथाम संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी वाहनों और उपकरणों का सही रखरखाव किया जाए। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के सभी लीसा डिपो में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाना भी जरूरी है।
मुख्य सचिव ने वन, मौसम और वन सर्वेक्षण संस्थान को भी फॉरेस्ट फायर के लिए प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि इस मॉडल के माध्यम से फॉरेस्ट फायर की संभावनाओं का पहले से ही अनुमान लगा सकते हैं, जिससे जानमाल की हानि को रोकने और कम करने में मदद मिलेगी।
पिरुल ब्रिकेट के उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल
मुख्य सचिव ने जंगलों से पिरूल का निस्तारण करने और पिरूल ब्रिकेट के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिरूल ब्रिकेट को एक विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य में अधिक से अधिक यूनिट स्थापित की जानी चाहिए। इससे वनाग्नि को रोकने में मदद मिलेगी और वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी। मुख्य सचिव का यह भी कहना है कि इससे स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और इस प्रयास को कार्बन क्रेडिट से भी जोड़ा जा सकता है।
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यह बैठक मुख्य सचिव के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके माध्यम से राज्य में वनाग्नि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। यह बैठक वनाग्नि की रोकथाम के लिए राज्य की जिज्ञासा और चिंता को दर्शाती है और यह भी सुनिश्चित करती है कि प्रिडिक्शन मॉडल की स्थापना से फॉरेस्ट फायर की घटनाओं में कमी आएगी।
टीम इंडिया ट्वोडे, अंजलि मेहता
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