श्रीनगर गढ़वाल में बेटी के अंतिम संस्कार की विषम परिस्थिति: गीली लकड़ी और डीजल का प्रयोग

रैबार डेस्क:  श्रीनगर गढ़वाल से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने... The post हृदय विदारक: गीली लकड़ियां और 4 घंटे इंतजार, डीजल की बौछार, विषम हालात में किया बेटी का अंतिम संस्कार appeared first on Uttarakhand Raibar.

Apr 6, 2026 - 18:27
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श्रीनगर गढ़वाल में बेटी के अंतिम संस्कार की विषम परिस्थिति: गीली लकड़ी और डीजल का प्रयोग
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श्रीनगर गढ़वाल में बेटी के अंतिम संस्कार की विषम परिस्थिति: गीली लकड़ी और डीजल का प्रयोग

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कम शब्दों में कहें तो, श्रीनगर गढ़वाल में एक परिवार को अपनी 19 वर्षीय बेटी का अंतिम संस्कार विषम परिस्थितियों में करना पड़ा। गीली लकड़ियों और अन्य सामग्री के अभाव में परिवार को 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा और अंत में डीजल का प्रयोग करना पड़ा। इससे न केवल परिवार की भावनाएं आहत हुईं, बल्कि इससे स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठते हैं।

रैबार डेस्क: यह घटना श्रीनगर गढ़वाल से सामने आई है, जहां एक परिवार को अपने प्रियजन का अंतिम विदाई देने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 19 वर्षीय युवती के निधन के बाद जब परिवार अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचा, तो उन्हें गीली लकड़ियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते चिता नहीं जल सकी और परिजनों को 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

आक्रोशित परिजनों ने आरोप लगाया कि लकड़ी का प्रबंध करने वाले टाल संचालक ने उन्हें गीली लकड़ियां दीं, जबकि उन्होंने इसके लिए उचित मूल्य अदा किया था। इस स्थिति ने परिवार को मानसिक पीड़ा के साथ-साथ अपमान का सामना कराया।

4 घंटे का इंतज़ार

चिता के पास पिता ने अपनी बेटी के शव के साथ घंटों इंतज़ार किया, जबकि परिवार कुछ नहीं कर सका। विकट परिस्थितियों ने यह तय किया कि उन्हें 15 लीटर डीजल मंगवाना पड़ा ताकि चिता को अग्नि मिल सके। जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्थिति और भी गम्भीर होती गई। कई प्रयासों के बाद भी लकड़ियां नहीं जलीं, जिसके कारण परिवार को फिर से डीजल और अन्य सामान जैसे टायर, गद्दे और कपड़े खरीदने पड़े।

लगभग 4 घंटे की कठिनाई के बाद आखिरकार चिता को अग्नि मिल पाई। इस घटना ने श्मशान घाटों की व्यवस्थाओं और जिम्मेदार तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन में रोष है। वार्ड पार्षद शुभम प्रभाकर ने नगर निगम मेयर को एक पत्र लिखकर घटना की निंदा की है। उन्होंने यह भी कहा कि, "मुनाफाखोरी इतनी बढ़ गई है कि अब शवों की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा।" उनके अनुसार, श्रीनगर नगर निगम क्षेत्र में एक सरकारी लकड़ी टाल की स्थापना बेहद आवश्यक है, ताकि निजी संचालकों की मनमानी से बचा जा सके।

यह घटना न केवल एक परिवार की दर्दनाक कहानी है, बल्कि यह समाज के उन पहलुओं को उजागर करती है, जहां मुनाफ़ा लोगों की भावनाओं और स्वाभिमान के खिलाफ खड़ा है। हमें इस बात पर विचार करने की आवश्यकता है कि कैसे हम अपने समाज में संवेदनशीलता और मनुष्यता को बढ़ावा दे सकते हैं।

इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसे कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। ऐसे मामलों में विस्तृत जांच और कार्यवाही आवश्यक है ताकि मानवता को प्राथमिकता दी जा सके।

अंत में, हम सभी को यह समझना चाहिए कि हमारे समाज में हर व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए, चाहे वह जीवित हो या मृत। हमें एक साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसा घटना भविष्य में न हो।

इसके अलावा, इस घटना के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

सादर,
टीम इंडिया टुडे - दीपिका शर्मा

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