हर घर लहराएगा दून का हैंडमेड तिरंगा: सहसपुर की महिलाएं बनाती हैं तिरंगे, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को सहसपुर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं साकार कर रही है। ग्रामीण महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहा सूती कपड़े का हैंडमेड तिरंगा इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को नई गति प्रदान कर रहा है। […] The post हर घर लहराएगा दून का हैंडमेड तिरंगा, देहरादून में समूह की महिलाएं बना रहीं तिरंगा first appeared on Vision 2020 News.

Aug 10, 2026 - 00:27
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हर घर लहराएगा दून का हैंडमेड तिरंगा: सहसपुर की महिलाएं बनाती हैं तिरंगे, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन

हर घर लहराएगा दून का हैंडमेड तिरंगा: सहसपुर की महिलाएं बनाती हैं तिरंगे, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

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कम शब्दों में कहें तो सहसपुर ब्लॉक की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हैंडमेड तिरंगे इस साल ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को नई दिशा दे रहे हैं। इन महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को साकार किया है।

सहसपुर ब्लॉक के शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट में महिलाएं अब तक 5000 से अधिक तिरंगे तैयार कर चुकी हैं। ये हैंडमेड तिरंगे सूती कपड़े से बनाए जा रहे हैं और रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) और एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से इस कार्य को गति मिल रही है।

दून में हर घर लहराएगा हैंडमेड तिरंगा

आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी के लिए विशाल संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। इन हैंडमेड तिरंगे की मांग स्कूलों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों में भी है। यह ना सिर्फ ग्रामीण महिलाओं के लिए एक रोजगार का साधन बना है, बल्कि यह उन्हें आत्मसम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का भी अनुभव कराता है। इस वर्ष, 26 जनवरी को तिरंगा निर्माण और बिक्री से समूह की महिलाओं ने लगभग 1 लाख रुपये की बचत अर्जित की।

स्वरोजगार का नया माध्यम

शंकरपुर स्थित इस सिलाई यूनिट का संचालन कर रही जयमाला ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं के कारण ग्रामीण महिलाएं अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। इस यूनिट के माध्यम से उन्हें विभिन्न और्डर प्राप्त होते हैं, जिससे वे मार्केट में अपनी पहचान बना सकती हैं। जयमाला का कहना है कि घर के समीप काम मिलने से महिलाएं पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ परिवार की देखभाल भी कर सकती हैं।

महत्वपूर्ण तिथियों पर तिरंगे की उच्च मांग

आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन की चाँदनी स्वयं सहायता समूह की सदस्य कविता ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के दौरान उन्हें राष्ट्रीय ध्वज बनाने की अधिक मांग प्राप्त होती है। इन अवसरों पर सरकारी विभागों, ब्लॉक कार्यालयों, स्कूलों, और राजनीतिक पार्टियों से उन्हें बेहतर व्यापार मिलता है। उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह सिलाई यूनिट न केवल रोजगार प्रदान करती है, बल्कि पहचान का माध्यम भी है।

फिर से खरीददारी: विभाग भी कर रहा है तिरंगे की खरीद

जिला परियोजना प्रबंधक रीप सोनम गुप्ता ने बताया कि सहसपुर ब्लॉक में सिलाई यूनिट की स्थापना की गई थी, जहाँ पर आस्था क्लस्टर की महिलाएं राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह महिलाएं पहले से ही इन तिथियों पर तिरंगे तैयार करती आ रही हैं। अब यूनिट का स्थापित होने से इनकी कार्यशैली बड़े स्तर पर हो रही है। इस समय, 15 से 20 महिलाएं इस यूनिट में काम कर रही हैं। हर घर तिरंगा अभियान को ध्यान में रखते हुए इन महिलाओं से तिरंगे खरीदे जा रहे हैं।

इस प्रकार, सहसपुर की महिलाएं केवल अपनी कला के माध्यम से घरों को तिरंगा पहुंचा ही नहीं रही हैं, बल्कि वे अपने परिवारों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रही हैं।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे, सुमन वर्मा

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