अंकिता भंडारी हत्याकांड: देहरादून में महापंचायत, सीबीआई जांच की सुप्रीम कोर्ट से निगरानी की मांग
रैबार डेस्क: अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग के लिए देहरादून के परेड ग्राउंड... The post अंकिता भंडारी हत्याकांड, देहरादून में महापंचायत, सीबीआई जांच की सुप्रीम कोर्ट के जज से निगरानी की मांग appeared first on Uttarakhand Raibar.
अंकिता भंडारी हत्याकांड: देहरादून में महापंचायत, सीबीआई जांच की सुप्रीम कोर्ट से निगरानी की मांग
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कम शब्दों में कहें तो, अंकिता भंडारी के न्याय की मांग के लिए देहरादून के परेड ग्राउंड में विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए।
महापंचायत में नागरिकों ने जोर देकर कहा कि सरकार अंकिता के मामले में केंद्रित सीबीआई जांच की दिशा में हस्तक्षेप कर रही है। महापंचायत का आयोजन अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के द्वारा किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों में ऑल इंडिया प्रगतिशील महिला एसोसिएशन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल थे।
वक्ताओं ने चिंता जताई कि सरकार की उपेक्षा की वजह से परिवार को न्याय नहीं मिल रहा है। परिजन और प्रदर्शनकारी सरकारी पक्ष की निष्क्रियता के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। उन्होंने मांग की कि सीबीआई जांच को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में रखा जाए। नेता अनिल जोशी की एफआईआर के आधार पर जांच करते हुए सीबीआई ने तथ्यों को अनदेखा किया है और अंकिता के माता-पिता को पक्षकार नहीं माना।
अंकिता के पिता, वीरेंद्र भंडारी, ने भावुक होते हुए कहा, "मैंने मुख्यमंत्री धामी को एक पत्र भेजा था जिसमें मैंने वीआईपी पर कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन सरकार हमारी मांगों को अनदेखा कर रही है।" वे आरोपियों की कॉल डिटेल की जानकारी के अलावा सबूतों को मिटाने वाले कार्यों पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
महापंचायत में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी का कहना है कि यह स्पष्ट है कि धामी सरकार वीआईपी को बचाने में जुटी हुई है। "हम अंत में न्याय के लिए लड़ने को प्रतिबद्ध हैं और हमने निर्णय लिया है कि हम सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर इस मांग को उठाएंगे।"
भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि "सरकार ने हाल ही में सड़कों पर हुए आंदोलनों के दबाव में सीबीआई जांच की घोषणा की। यदि सरकार ने हमारी मांगों को पहले स्वीकार कर लिया होता, तो हमें इस महापंचायत की आवश्यकता नहीं होती।"


महापंचायत के प्रस्ताव
- पंद्रह दिनों के भीतर यदि पीड़ित परिवार की शिकायत आगे नहीं बढ़ी तो महापंचायत फिर से आयोजित होगी, राष्ट्रपति से मुलाकात होगी।
- अंकिता के माता-पिता के शिकायती पत्र को ही सीबीआई जांच के लिए समान माना जाए।
- भाजपा नेता को जांच के दायरे में लाया जाए और निष्कासित किया जाए।
इस महापंचायत का उद्देश्य अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाना और सरकार से एक ठोस कार्रवाई की मांग करना है। यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए, तो आंदोलनकारी अगले कदम की योजना बनाएंगे।
यह बैठक जनता के गुस्से और उसकी दुखभरी कहानी को सामने लाने का एक तरीका थी। ऐसे में, आने वाले दिनों में इस मुद्दे का राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर होगा, यह देखना होगा।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे
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