अग्निवीर शहीद परिवार को पेंशन से वंचित करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त आदेश, केंद्र से मांगा जवाब
मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच लाभों को लेकर होने वाले कथित भेदभाव पर केंद्र सरकार को कड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए अग्निवीर मुरली धोंडिबा नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक की याचिका पर रक्षा मंत्रालय को …
अग्निवीर शहीद परिवार को पेंशन से वंचित करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त आदेश
कम शब्दों में कहें तो, बॉम्बे हाईकोर्ट ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच भेदभाव को लेकर केंद्र सरकार को कड़ा झटका दिया है। यह आदेश जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए अग्निवीर मुरली धोंडिबा नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक की याचिका पर दिया गया है।
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच लाभों को लेकर हो रहे कथित भेदभाव पर केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने शहीद अग्निवीर मुरली धोंडिबा नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक की याचिका पर रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी।
न्यायमूर्ति रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति वाय. जी. खोब्रागड़े की खंडपीठ ने कहा है, "अग्निवीर भी सीमा पर नियमित सैनिकों की तरह ही गोली खाते हैं, वही जोखिम उठाते हैं। ऐसे में उनके परिवारों को पेंशन और अन्य दीर्घकालिक लाभ से वंचित क्यों रखा जाता है?"
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में यह दावा किया गया है कि 9 मई 2025 को पुंछ सेक्टर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद हुए अग्निवीर मुरली नाइक का परिवार केवल एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि और कुछ सीमित लाभों तक ही सीमित रहा, जबकि समान परिस्थिति में शहीद होने वाले नियमित सैनिक के परिवार को आजीवन फैमिली पेंशन, एक्स-ग्रेशिया, कैंटीन सुविधा, चिकित्सा लाभ और अन्य कल्याणकारी योजनाएं मिलती हैं।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि अग्निवीर और नियमित सैनिकों के बीच यह भेदभाव “मनमाना, तर्कहीन और असंवैधानिक” है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
ऑपरेशन सिंदूर का संक्षिप्त विवरण
याचिका में बताया गया है कि भारतीय सेना ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। इसी अभियान के दौरान 9 मई को पुंछ में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में अग्निवीर मुरली नाइक शहीद हो गए। वे जून 2023 में अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए थे।
शहीद होने के बाद उनकी मां ने कई बार रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर नियमित सैनिकों के समान लाभ देने की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
याचिका की प्रमुख मांगें
- शहीद अग्निवीरों के परिवारों को भी नियमित सैनिकों की तरह आजीवन फैमिली पेंशन और अन्य सभी कल्याणकारी लाभ दिए जाएं।
- अग्निपथ योजना के उन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया जाए जो अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच भेदभाव करते हैं।
याचिका में पूरी अग्निपथ योजना की वैधता को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि केवल भेदभावपूर्ण प्रावधानों पर सवाल उठाया गया है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि अग्निपथ योजना 2022 में शुरू की गई थी और इसके तहत भर्ती सैनिकों को चार साल की सेवा के बाद बिना पेंशन के रिटायरमेंट दिया जाता है।
अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से इसे लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन और कानूनी चुनौतियाँ उठाई जा रही हैं। यह मुद्दा न केवल न्यायिक कर्तव्यों का स्पष्ट उल्लंघन करता है, बल्कि शहीदों के प्रति हमारी जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है।
इस मामले में आने वाले निर्णय से अग्निवीरों को मिलने वाले लाभ की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है, जो कि हमारे बहादुर सैनिकों के प्रति न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
अधिक अपडेट के लिए, विजिट करें India Twoday
सादर,
टीम इंडिया टुडे वुमन
What's Your Reaction?