अस्कोट के वीर दीपक कुमार: सियाचिन में शहीद होकर देश को किया गर्वित

रैबार डेस्क:  उत्तराखंड के लिए बुरी खबर है। पिथौरागढ़ के अस्कोट निवासी भारतीय सेना के... The post अस्कोट के लाल दीपक कुमार सियाचिन में फर्ज निभाते हुए शहीद appeared first on Uttarakhand Raibar.

Apr 20, 2026 - 18:27
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अस्कोट के वीर दीपक कुमार: सियाचिन में शहीद होकर देश को किया गर्वित
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अस्कोट के वीर दीपक कुमार: सियाचिन में शहीद होकर देश को किया गर्वित

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट निवासी भारतीय सेना के जवान दीपक कुमार सिंह ने सियाचिन में वीरता से अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए शहादत प्राप्त की है। उनकी बीमारी के कारण दिल्ली के आरआर अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हुआ।

दीपक कुमार सिंह, जो भारतीय सेना की 7-कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे, पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। परिवार के अनुसार, दीपक को सियाचिन में उनकी ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने पर भर्ती किया गया था। उन्होंने अपनी अंतिम सांस रविवार को ली, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल छा गया।

लेखक की दृष्टि

दीपक कुमार की शहादत केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड और भारत के लिए एक गहरा धक्का है। ऐसे समय में जब हमारे सशस्त्र बल देश की सरहदों की सुरक्षा के लिए उच्चतम बलिदान दे रहे हैं, दीपक की शहादत हम सभी को याद दिलाती है कि हम अपने जवानों की कर्तव्यनिष्ठा और उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान करें।

परिवार का हाल

दीपक के परिवार में उनकी पत्नी रीना, पांच साल का बेटा काव्यांश, और बुजुर्ग मां के अलावा दो बड़े भाई भी हैं। उनके पिता का निधन पहले ही हो चुका था। दीपक का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव ओझा मल्ला लाया जा रहा है, जहां उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। इस कठिन समय में परिवार को समस्त समाज का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

दीपक कुमार की शहादत के समाचार पर पूरे अस्कोट और पिथौरागढ़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग दीपक को एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक के रूप में याद कर रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं हमें यह बताने के लिए काफी हैं कि हमारे जवान कितनी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

समर्पण का प्रतीक

हमारे जवानों का बलिदान सच्चे समर्पण और जाति-धर्म से परे कर्तव्य की भावना का प्रतीक है। दीपक कुमार जैसे बहादुर सैनिक भारतीय सेना की रीढ़ की हड्डी हैं। उनकी शहादत से प्रेरित होकर हमें उनके द्वारा दर्शाए गए साहस और बलिदान को याद रखना चाहिए।

इस घटना के माध्यम से यह भी ज्ञात होता है कि सियाचिन में तैनात हमारे सैनिक कितनी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह समय है कि हम उनके स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति जागरूक रहें।

अंत में, दीपक कुमार को हमारी श्रद्धांजलि। उनके परिश्रम, कर्तव्य और बलिदान का सम्मान हमेशा किया जाएगा।

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सादर,

टीम इंडिया ट्वोडे
नैना शर्मा

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