उच्चस्तरीय जांच: उत्तराखंड के बीईओ 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
हरिद्वार: उत्तराखंड विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और सख्त कार्रवाई करते हुए हरिद्वार जिले के बहादराबाद ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बृजपाल सिंह राठौर को 20 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। उनके साथ ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) मुकेश को भी हिरासत में लिया गया, जो मंगोलपुर …
हरिद्वार में शिक्षा विभाग पर लगा कलंक, रिश्वत लेते खंड शिक्षा अधिकारी गिरफ्तार
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड विजिलेंस विभाग ने हरिद्वार जिले में एक बड़े भ्रष्टाचार मामले का खुलासा करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बृजपाल सिंह राठौर को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। इस मामले में उनके सहयोगी मुकेश को भी गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा रही है।
हरिद्वार के बहादराबाद ब्लॉक के बीईओ बृजपाल सिंह राठौर पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी स्कूल के मान्यता नवीनीकरण के लिए प्रमाणपत्र जारी करने के लिए रिश्वत मांगी। मंगोलपुर श्यामपुर के सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मुकेश भी इस मामले में शामिल हैं।
विशेषज्ञों की राय और शिक्षा विभाग की स्थिति
विजिलेंस टीम ने शिकायती पत्र मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक सत्यापन के बाद सत्यापन की प्रक्रिया के तहत ट्रैप ऑपरेशन आयोजित किया गया। देहरादून से आई विजिलेंस टीम ने रोशनाबाद के जिला मुख्यालय स्थित बीईओ के कार्यालय पर छापा मारा और राठौर को रिश्वत की राशि लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान मुकेश, जो राठौर के करीबी सहयोगी हैं, भी पकड़े गए।
सूत्रों के अनुसार, बृजपाल सिंह राठौर लंबे समय से हरिद्वार जिले में विभिन्न पदों पर तैनात रहे हैं और इनकी गिरफ्तारी ने विभाग के भीतर एक नया हलचल पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है ताकि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके।
भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस का कदम
उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई उत्तराखंड विजिलेंस विभाग द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए ठोस कदमों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण तत्व है। विभाग का उद्देश्य है कि भ्रष्टाचार से जुड़े सभी मामलों को न केवल पकड़ा जाए, बल्कि सख्त सजा भी दी जाए। इस तरह की कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि सरकारी संस्थानों में भी पारदर्शिता लाना आवश्यक है।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अधिक गहन पूछताछ के लिए देहरादून ले जाया गया है। विजिलेंस विभाग इस मामले की गहन जांच कर रहा है, और इससे संबंधित सभी दस्तावेजों और गवाहों की जांच भी जारी है। विदित हो कि इससे पहले भी ऐसे कई मामलों में कार्रवाई की गई है, लेकिन यह मामला शिक्षा विभाग से जुड़ा होने के कारण बेहद गंभीर हो जाता है।
समाज में जागरूकता और सतर्कता की आवश्यकता
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या हमारे सिस्टम में सुधार की जरूरत नहीं है। समाज को भी जागरूक होनी की आवश्यकता है ताकि कोई भी व्यक्ति रिश्वत देने या लेने की स्थिति में न रहे। शिक्षा का अधिकार सभी का है, और इसे बिना किसी बाधा के पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।
कुल मिलाकर, हरिद्वार में हुई इस कार्रवाई ने यह दर्शा दिया है कि भ्रष्टाचार समाप्त करने के प्रति विजिलेंस विभाग की संवेदनशीलता और तत्परता प्रमुख है। शिक्षा विभाग में इस तरह के कदमों से आशा की किरण जागृत होती है कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति कम होगी।
विजिलेंस विभाग द्वारा इस तरह की कार्रवाईयों का होना बेहद आवश्यक है और इसे सराहा जाना चाहिए। इस प्रकार के कदमों के माध्यम से ही हम एक बेहतर और पारदर्शी प्रशासन की ओर बढ़ सकते हैं।
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सादर, टीम इंडिया टुडे – दीप्ति शर्मा
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