उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर बड़ा फैसला, दिसंबर तक खत्म होगा पुराना कचरा
देहरादून : सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। उन्होंने बताया कि 01 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू इस नियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उत्तराखंड में शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों के […] The post उत्तराखंड में कचरे पर सरकार का बड़ा एक्शन, दिसंबर तक खत्म होगा पुराना Legacy Waste first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर बड़ा फैसला, दिसंबर तक खत्म होगा पुराना कचरा
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। इस योजना के अनुसार, दिसंबर 2026 तक पुराना लीगेसी वेस्ट खत्म किया जाएगा।
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देहरादून : सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि 01 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू होने वाले नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।
नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की विशेषताएँ
डॉ. धकाते ने जानकारी दी कि नए नियमों में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया गया है। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग एवं संसाधनों के पुनः उपयोग की दिशा में काम किया जाएगा। इस अवसर पर सहायक निदेशक पीआईबी देहरादून, संजीव सुन्दिरयाल और शहरी विकास निदेशक, श्री प्रवीण कुमार भी उपस्थित थे।
दिसंबर 2026 तक समाप्त होगा पुराना लीगेसी वेस्ट
डॉ. धकाते ने बताया कि जिन संस्थानों का क्षेत्रफल 2,000 वर्ग मीटर से अधिक है, जो प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल का उपयोग करते हैं या प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं, वे बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आएंगे। ऐसे संस्थानों को पंजीकरण कराना होगा और कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी उन पर होगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक जनपद में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी करेंगे।
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की उपलब्धियां
डॉ. धकाते के अनुसार, वर्तमान में राज्य में लगभग शत प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। कचरे के चार श्रेणियों में पृथक्करण के लिए 500 वाहनों को चार कम्पार्टमेंट की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम का अनुप्रयोग कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी में सहायक होगा। हर दिन लगभग 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है, जिसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन का प्रसंस्करण किया जा रहा है।
सतत विकास की दिशा में कदम
वस्तुतः, उत्तराखंड सरकार का यह कदम न केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान देगा। राज्य में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर पहले से कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, 657 नए कचरा संग्रहण वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें से 480 ई-वाहन हैं। यह सब उत्तराखंड को एक स्वच्छ और हरित राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
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सादर,
टीम इंडिया ट्वोडे, सुमन कुमारी
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