उत्तराखंड में “प्लेस ऑफ सेफ्टी” का उद्घाटन, किशोरों के लिए एक नई शुरुआत

हरिद्वार : उत्तराखंड में गंभीर अपराधों के मामलों में न्यायालय में विचाराधीन 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के लिए पहली बार अलग ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ बनाया जाएगा। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को हरिद्वार के रोशनाबाद में 555.15 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस अत्याधुनिक […] The post मंत्री रेखा आर्या ने किया प्रदेश के पहले “प्लेस ऑफ सेफ्टी” का शिलान्यास, 16 से 18 वर्ष तक के विचाराधीन किशोर के लिए बनेगा विशेष भवन first appeared on Vision 2020 News.

Jul 14, 2026 - 09:27
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उत्तराखंड में “प्लेस ऑफ सेफ्टी” का उद्घाटन, किशोरों के लिए एक नई शुरुआत
हरिद्वार : उत्तराखंड में गंभीर अपराधों के मामलों में न्यायालय में विचाराधीन 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग क

उत्तराखंड में “प्लेस ऑफ सेफ्टी” का उद्घाटन, किशोरों के लिए एक नई शुरुआत

हरिद्वार: उत्तराखंड में 16 से 18 वर्ष आयु के विचाराधीन किशोरों के लिए पहली बार एक अलग ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ का निर्माण किया जाएगा। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को हरिद्वार के रोशनाबाद में 555.15 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस अत्याधुनिक भवन का शिलान्यास किया। यह परिसर प्रदेश का पहला ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ होगा, जहाँ राज्य के सभी जनपदों के गंभीर आपराधिक मामलों में विचाराधीन किशोरों को रखा जाएगा।

कम शब्दों में कहें तो, यह भवन न केवल किशोरों को सुरक्षित स्थान प्रदान करेगा, बल्कि उनके जीवन में सुधार लाने के लिए एक सकारात्मक वातावरण भी बनाएगा। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं.

मंत्री रेखा आर्या ने बयान दिया

शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि "किसी भी संवेदनशील सरकार की असली पहचान इस बात से होती है कि वो समाज के सबसे कमजोर वर्ग के प्रति कितनी जिम्मेदारी निभाती है।" उन्होंने बताया कि यह भवन सिर्फ एक ढांचा नहीं होगा, बल्कि भटके हुए किशोरों के लिए एक सुधारात्मक और सुरक्षित केंद्र बनेगा, जहाँ वे अपने जीवन की दिशा को बदल सकेंगे।

किशोर न्याय अधिनियम का महत्व

मंत्री आर्या ने आगे कहा कि किशोर न्याय अधिनियम का मुख्य उद्देश्य केवल दंड देना नहीं है, बल्कि बच्चों को सुधारकर समाज की मुख्यधारा में लौटाना है। 16 से 18 वर्ष की आयु में बच्चे कई बार गलत संगति, परिस्थिति या मार्गदर्शन के अभाव में अपराध की ओर बढ़ सकते हैं।

ऐसे किशोरों को सजा प्राप्त अपराधियों के साथ रखना उनके भविष्य के लिए और घातक सिद्ध हो सकता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इन विचाराधीन किशोरों के लिए एक अलग 'प्लेस ऑफ सेफ्टी' का निर्माण करने का निश्चय किया है।

सकारात्मक वातावरण का निर्माण

मंत्री आर्या ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह परिसर केवल एक आवासीय केंद्र तक सीमित न रहे, बल्कि यहाँ एक ऐसा वातावरण विकसित किया जाए जो किशोरों के व्यक्तित्व और मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन ला सके। योजना के अनुसार, यहाँ मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की व्यवस्था की जाएगी, साथ ही शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास के प्रभावी प्रबंध किए जाएंगे।

मंत्री ने आशा व्यक्त की कि यहाँ से बाहर निकलने वाला प्रत्येक किशोर आत्मविश्वास, हुनर और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना के साथ समाज में लौट सकेगा। यह पहल न केवल किशोरों के जीवन को प्रभावित करेगी, बल्कि समाज में सुधार का महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।

इस शिलान्यास के साथ ही उत्तराखंड ने एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है, जो न केवल किशोरों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि उन्हें एक नई शुरुआत करने का अवसर भी प्रदान करेगा।

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सादर, टीम इंडिया टुडे, सुनिता शर्मा

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