उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी में पीएम के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम

प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद का सशक्त मंच बना ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–02’ लोक संस्कृति को विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार निरंतर कार्यरत : मुख्यमंत्री धामी   प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र पर आगे बढ़ रहा राज्य: पुष्कर सिंह धामी    दिल्ली: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में ‘हम सबका […] The post प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र पर आगे बढ़ रहा राज्य: पुष्कर सिंह धामी  first appeared on Vision 2020 News.

Jan 31, 2026 - 18:27
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उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी में पीएम के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम
प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद का सशक्त मंच बना ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–02’ लोक संस्कृति को

उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी में पीएम के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम

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कम शब्दों में कहें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में आयोजित उत्तराखण्ड महोत्सव में प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद को प्रोत्साहित किया और लोक संस्कृति को विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

दिल्ली: उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंंगलवार को दिल्ली स्थित रोहिणी में ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन–02’ में भाग लिया। इसमें बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डियों, लोक कलाकारों, युवाओं और महिलाओं ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को महोत्सव में प्रदर्शित करने के लिए सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से कई जानकारों को सम्मानित किया। इनमें चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज गोरखेला और लोक गायिका कल्पना चौहान शामिल हैं। उत्तराखण्ड महोत्सव

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम लोक कलाकारों को आत्मसम्मान और समाज में सेवा करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति अपने गीतों, नृत्यों और परंपराओं के माध्यम से आज भी जीवंत है, विशेषकर उन प्रवासी उत्तराखण्डियों के लिए जो देश-विदेश में रहते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि वे बच्चों और युवाओं को अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करने का अवसर प्रदान करते हैं। लोकनृत्य और लोकगीत राज्य की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कार्यक्रम में

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड को ऐसे स्थान के रूप में वर्णित किया जो आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि है। उन्होंने उल्लेख किया कि क्षेत्र का धार्मिक महत्व बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना जैसे पवित्र स्थलों के कारण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार संस्कृति को विकास से जोड़ने का प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र का उल्लेख किया, जो राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्विकास की दिशा में काम कर रहा है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण से न केवल श्रद्धालुओं को असीम आस्था मिली है, बल्कि इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।

मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि उत्तराखण्ड अब वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले कई पहल, जैसे विंटर टूरिज्म, 'वेड इन उत्तराखण्ड' और होम-स्टे, ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में सहायक बन रहे हैं। उत्तराखण्ड महोत्सव कार्यक्रम

महिलाओं के सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। 'एक जनपद-दो उत्पाद' योजना और 'हाउस ऑफ हिमालयाज' ब्रांड से राज्य के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उत्तराखण्ड ने सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अभूतपूर्व प्रगति की है। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, बजट और स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार हुआ है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने के क्षेत्र में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी

विधानिक और पारदर्शी शासन के अंतर्गत, मुख्यमंत्री ने राज्य में सुशासन को साकार करने के लिए सख्त कानूनों और समान नागरिक संहिता के प्रभावी कार्यान्वयन को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री द्वारा कहे गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्धता से कार्यरत है।

अंत में, धामी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और विरासत को संजोए रखें और इसके विकास में सहयोग करें। यह न केवल राज्य की पहचान है, बल्कि हमारे भविष्य का मार्गदर्शक भी बनेगा।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे

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