उत्तराखंड में वन्यजीवों एवं मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा सरकार: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास करने के दिए निर्देश वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक आयोजित की […] The post वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखंड में वन्यजीवों एवं मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा सरकार: मुख्यमंत्री
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही है। यह कदम उनकी अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक में उठाया गया है।
देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक आयोजित की। इस बैठक में उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और इसके नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री का कहना है कि भालू, गुलदार, बाघ और हाथियों से जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। इसलिए वन विभाग और जिला प्रशासन को एकजुट होकर निगरानी प्रणाली को सक्रिय रखने के लिए कहा गया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपाय
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्रभावी बनाए रखा जाए। प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी बी फेंसिंग, वॉच टावर और अन्य सुरक्षात्मक उपायों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों को सतर्कता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
संरक्षण के उपाय एवं योजना
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में हाथियों और बाघों सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण को प्रमुखता दी जाएगी। इसके लिए आवागमन वाले मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास का निर्माण किया जाएगा। यदि वर्तमान वन्यजीव संरक्षण नियमों में कुछ संशोधन की आवश्यकता होती है, तो संबंधित विभागों को इसे तत्काल शासन को भेजने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में वन्यजीव समन्वय समितियों को सक्रिय बनाए रखा जाएगा। इसके तहत संवेदनशील जिलों, ब्लॉक और गांवों की हॉट स्पॉट मैपिंग पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।
ठोस कचरा प्रबंधन एवं ईको-टूरिज्म पर जोर
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है ताकि भालू और अन्य वन्यजीवों को आबादी के पास न आने दिया जाए। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की वाइल्डलाइफ सेंचुरी और कंजरवेशन रिजर्व क्षेत्रों में विकास कार्य किए जाएंगे।
वन भूमि हस्तांतरण एवं अन्य प्रस्तावों पर चर्चा
बैठक में कुल 9 वन भूमि हस्तांतरण प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। इनमें रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के लिए पेयजल योजनाएं और राजाजी नेशनल पार्क से संबंधित मोटरमार्ग योजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही संरक्षित क्षेत्रों की 10 किलोमीटर परिधि में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ संदर्भित करने का निर्णय लिया गया।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा में संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम हैं, जिससे उत्तराखंड में वन्यजीव प्रबंधन प्रणाली अधिक मजबूत होगी।
बैठक में मौजूद अन्य उपस्थित सदस्यों में विधायक दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान और प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र शामिल थे।
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