उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता: सीएम धामी के गौरवपूर्ण क्रियान्वयन का ऐतिहासिक क्षण
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने समान नागरिक संहिता को तैयार करने वाले कमेटी के सदस्यों, कुशल क्रियान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम के […]
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता: सीएम धामी के गौरवपूर्ण क्रियान्वयन का ऐतिहासिक क्षण
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने से यहां की महिलाएं और समाज के अन्य वर्गों को बड़ा लाभ होगा।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित पहले “समान नागरिक संहिता दिवस” को लेकर एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया। इस अवसर पर उन्होंने समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए बनाई गई समिति के सदस्यों, कुशल कार्यान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में मदद करने वाले वीएलसी (वीजिटेबल फूड अर्थात नागरिक समिति) के सदस्यों को विशेष सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित एक फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
उत्तराखंड का एक स्वर्णिम अध्याय
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में बनेगा। इस दिन राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो पाई है। उन्होंने कहा कि हमें अपने धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों से गर्व है, जिससे हमें समरसता की भावना मिलती है।
संविधान निर्माताओं का संकल्प
सीएम धामी ने याद दिलाया कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने 'समान नागरिक संहिता' को संविधान के अनुच्छेद 44 में शामिल किया था। उनका उद्देश्य था कि सभी citoyens के लिए एक समान कानून होना चाहिए। पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया।
महिला सशक्तिकरण का नया युग
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी लागू होने से सामाजिक असमानता को कम करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया युग शुरू हुआ है। अब मुस्लिम महिलाओं के लिए कुरीतियों से मुक्ति मिल गई है। उन्होंने कहा कि कई दशकों से यूसीसी को वोट बैंक राजनिती के तहत लागू नहीं किया गया, जबकि यह दुनिया भर के विकसित देशों में पहले से लागू है।
समानता से समरसता
सीएम धामी ने घोषणा की कि समान नागरिक संहिता धर्म या पंथ को प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह कुप्रथाओं को दूर कर समाज में समानता और समरसता का कानून बनाती है। यह संहिता विवाह, उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को समान बनाती है। उन्होंने जोड़ते हुए कहा कि समाज में सभी को समान अधिकार मिलते हैं, और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप को सशक्त बनाना
सुरक्षा के उद्देश्य से लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण से संबंधित जानकारी को अभिभावकों से छिपाकर रखा जाएगा। लिव-इन के दौरान जन्मे बच्चों को भी जैविक संतान के समान सभी अधिकार मिलेंगे।
सिर्फ घोषणाएं नहीं, सफल क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि उनकी सरकार ने यूसीसी को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे प्रभावी ढंग से लागू भी किया है। पिछले एक वर्ष में, विवाह पंजीकरण की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह संख्या 67 से बढ़कर प्रतिदिन 1400 से ज्यादा हो गई है।
विवाह में धोखाधड़ी पर सख्ती
हाल ही में सरकार ने विवाह में धोखाधड़ी के मामलों पर सख्ती का प्रावधान किया है। अगर कोई अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताता है, तो विवाह को निरस्त किया जाएगा।
देश को जोड़ने की दिशा में मजबूत फैसले
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह साबित हुआ है कि मजबूत फैसले देश को तोड़ते नहीं, बल्कि जोड़ते हैं। यूसीसी के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि समाज को बेहतरीन दिशा में ले जाना संभव है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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सादर, टीम इंडिया टुडे - सुमिता
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