‘कल्याण’ पत्रिका का शताब्दी समारोह: अमित शाह ने बताया भारतीय संस्कृति का अहम वाहक
उत्तराखंड के ऋषिकेश में बुधवार को गीता भवन, स्वर्गाश्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गीता प्रेस की मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक का विमोचन…
‘कल्याण’ सौ वर्षों से भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति का वाहक: अमित शाह
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कम शब्दों में कहें तो, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऋषिकेश में ‘कल्याण’ पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन करते हुए इसे भारतीय ज्ञान और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताया।
ऋषिकेश में आयोजित भव्य कार्यक्रम
उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित गीता भवन, स्वर्गाश्रम में बुधवार को एक विशेष आयोजन हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गीता प्रेस की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक का विमोचन किया।
कार्यक्रम में नेताओं की भागीदारी
इस समारोह में मुख्यमंत्री धामी ने राज्य के सांस्कृतिक और विकास कार्यों पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए इसे उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का सांस्कृतिक धरोहर एवं विकास कार्यों के दिशा में उनकी सरकार की योजनाएँ स्थायी और दूरगामी परिणाम लाएंगी।
धामी सरकार की सराहना
उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धामी सरकार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की सराहना की। Shah ने कहा, “कल्याण पत्रिका केवल एक प्रकाशन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा माध्यम है जिसने पिछले सौ वर्षों में भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति को जीवित रखा है।”
क्यों महत्वपूर्ण है ‘कल्याण’ पत्रिका?
‘कल्याण’ पत्रिका ने भारतीय संस्कृति को प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पत्रिका न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों को समर्पित है, बल्कि भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को भी उजागर करती है। इसके माध्यम से पाठकों को सामयिक मुद्दों पर विचार और ज्ञान प्रदान किया जाता है।
समाज में ‘कल्याण’ का स्थान
‘कल्याण’ ने पिछले सौ वर्षों में न केवल भारतीय समाज को प्रभावित किया बल्कि कई पीढ़ियों को प्रेरित भी किया है। यह प्रतिमान हमारे लिए एक प्रेरणा स्रोत है, जो सच्चाई, ज्ञान, और संस्कृति के प्रति हमारी समझ को बढ़ाती है।
आगे की चुनौती और दृष्टिकोण
हालांकि, इस अवसर पर विचार करते हुए, अमित शाह ने भविष्य की चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे नए संदर्भों में पेश करने की आवश्यकता है। “सिर्फ अध्यात्मिकता ही नहीं, बल्कि हमें तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आगे बढ़ने की आवश्यकता है,” उन्होंने जोड़ा।
इस प्रकार, ‘कल्याण’ पत्रिका समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और इसे एक नई दिशा देने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे - सुमिता मेहता
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