किशाऊ बांध के खिलाफ क्वाणू गांव के ग्रामीणों का महापंचायत में जोरदार विरोध

रैबार डेस्क: हिमाचल औऱ उत्तराखंड के बॉर्डर पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना... The post क्वानू की जमीन पर नहीं बनने देंगे किशाऊ बांध ,जौनसार बावर की महापंचायत में ग्रामीणों का ऐलान appeared first on Uttarakhand Raibar.

Sep 25, 2026 - 09:27
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किशाऊ बांध के खिलाफ क्वाणू गांव के ग्रामीणों का महापंचायत में जोरदार विरोध

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कम शब्दों में कहें तो, हिमाचल और उत्तराखंड के सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई है।

रैबार डेस्क: हाल ही में, किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर जौनसार बावर क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों का विरोध खुलकर सामने आया है। इस संदर्भ में आयोजित महापंचायत में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लगभग 20 गांवों से स्थानीय लोग शामिल हुए। इनमें महिलाओं की भागीदारी भी काफी उल्लेखनीय रही। शुक्रवार को ग्रामीणों ने हरिपुर-मीनस मोटरमार्ग पर चक्काजाम कर इस परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

ग्रामीणों की चिंताएं

ग्रामीणों का मानना है कि सरकार की ओर से इस परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर सिंचाई और बिजली उत्पादन का लाभ मिलने की बात की जा रही है, लेकिन इसके मुकाबले, परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों के लिए विस्थापन और उनकी जमीनों के अधिकार पर कोई स्पष्टता नहीं दिख रही है।

गाँव वालों ने कहा है कि यह एक विकास परियोजना है, लेकिन इसका असर उनकी जीवनशैली, खेती और रोजीरोटी पर पड़ेगा। वे यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि प्रस्तावित स्थान पर बांध बनने से उनकी समृद्ध और उपजाऊ मिट्टी हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी। इसलिए, वे किसी भी हाल में क्वाणू क्षेत्र में इस बांध का निर्माण नहीं होने देने का दृढ़ संकल्प लिया है।

महापंचायत में उठे मुद्दे

महापंचायत में कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई गईं। ग्रामीणों ने परियोजना क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे कराने और प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति में पारदर्शिता लाने की माँग की। उनका कहना है कि जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

महापंचायत के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़क पर मौजूद थे, जिससे हरिपुर-मीनस मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और प्रशासन को सभी पहलुओं पर स्पष्ट बातचीत करनी चाहिए।

निष्कर्ष

इस परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का यह आंदोलन केवल उनके अधिकारों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि उनके भविष्य की सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। वे यह स्पष्ट कर रहे हैं कि विकास का मतलब केवल जलवायु परिवर्तन और बिजली उत्पादन नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों की भलाई भी प्राथमिकता होनी चाहिए।

अंत में, हम आशा करते हैं कि सरकार और संबंधित अधिकारी इन गांववालों की आवाज को सुनें और उनका उचित समाधान करें। इन मुद्दों पर चर्चा करने की आवश्यकता है ताकि परियोजनाओं का लाभ सभी को मिल सके।

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इस समाचार को लिखा है सुमन कुमारी, टीम इंडिया टुडे

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