कैंसर पीड़ित माता-पिता को बेदखल करने के मामले में प्रशासन ने लिया सख्त एक्शन; बेटों को होगा जिला बदर
रैबार डेस्क: क्या कोई अपने बीमार माता पिता को घर से बेघर कर सकता है? देहरादून... The post कैंसर पीड़ित मां-बाप को बेटे कर रहे थे घर से बेदखल; DM ने सुनी व्यथा, अब हो सकते हैं जिला बदर appeared first on Uttarakhand Raibar.
कैंसर पीड़ित माता-पिता को बेदखल करने के मामले में प्रशासन ने लिया सख्त एक्शन; बेटों को होगा जिला बदर
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में दो बेटों ने अपने बीमार माता-पिता को घर से बेदखल करने की कोशिश की, जिससे प्रशासन को एक्शन लेना पड़ा। डीएम सविन बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोषी बेटों को जिला बदर करने की चेतावनी दी है।
देहरादून में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसमें दो बेटों ने अपने कैंसर पीड़ित माता-पिता को घर से निकालने की कोशिश की। यह मामला तब सामने आया जब बुजुर्ग दंपत्ति ने जिलाधिकारी कार्यालय में अपने दुखों की कहानी सुनाई। उनकी गुहार सुनकर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले को गंभीरता से लिया।
डीएम से गुहार लगाने पहुंचे माता-पिता
10 नवम्बर को जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान बुजुर्ग गीता और उनके पति राजेश ने डीएम सविन बंसल से मदद की अपील की। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटों ने उनसे मारपीट की, गालियाँ दीं और उन्हें घर से बेदखल करने पर आमादा हैं। परेशान बुजुर्ग दंपत्ति फिलहाल एक किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन ने लिया सख्त एक्शन
बुजुर्ग दंपत्ति की पीड़ा सुनते ही डीएम ने तुरंत कार्यवाही शुरू कर दी। उन्होंने गुंडा एक्ट के तहत दोनों बेटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए और उन्हें नोटिस जारी किया। जिला प्रशासन ने दोनों बेटों को 25 नवम्बर तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है। अगर वे इस निमंत्रण का जवाब नहीं देंगे या अपनी गलती नहीं मानते, तो उन्हें जिला बदर करने की कार्रवाई की जाएगी।
धारा 125 और अन्य कानूनों का सहारा
जिलाधिकारी सविन बंसल ने माता-पिता को प्रताड़ित करने और उनके अधिकारों का उल्लंघन करने के खिलाफ सख्त कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों को हल्के में नहीं लिया जाएगा। इसके तहत कई ऐसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है जो माता-पिता की भरण-पोषण से जुड़े मामले हैं।
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रियाएँ
डीएम के इस फैसले की समाज के विभिन्न वर्गों में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा लिए गए इस सख्त निर्णय से अन्य ऐसे मामलों में भी कार्रवाई को प्रोत्साहन मिलेगा। बुजुर्ग दंपत्ति की तरह अन्य पीड़ितों को भी निश्चय ही राहत मिलेगी।
निष्कर्ष
इस मामले ने फिर से सवाल उठाया है कि क्या हम अपने माता-पिता, विशेषकर बीमार अवस्था में, को इस तरह से प्रताड़ित कर सकते हैं। आज के समाज में परिवारों के बीच आपसी रिश्तों की महत्वपूर्णता को समझने की आवश्यकता है। प्रशासन का यह कदम न केवल पीड़ित दंपत्ति के लिए राहत का कारण बना, बल्कि यह अन्य संभावित मामलों को भी रोकने में सहायक बनेगा।
अपने माता-पिता की देखभाल करना हर बच्चे का कर्तव्य है, और इस दिशा में प्रशासन के ठोस कदम स्वागत योग्य हैं। इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बुजुर्गों को भी समाज में स्थान मिले।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे द्वारा, सिया
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