गौ संस्कृति के संरक्षण का संदेश ‘सुरों की उमंग अनूप जलोटा के संग’ कार्यक्रम में
मुंबई। गुरु नानक खालसा कॉलेज, मुंबई के हिंदी विभाग के तत्वावधान में उमा कल्याण ट्रस्ट एवं जलोटा वेलफेयर फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से आयोजित ‘सुरों की उमंग अनूप जलोटा के संग – एक संगीतमय प्रेरणा युवाओं के बीच’ कार्यक्रम में गौ संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए …
गौ संस्कृति के संरक्षण का संदेश ‘सुरों की उमंग अनूप जलोटा के संग’ कार्यक्रम में
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कम शब्दों में कहें तो, मुंबई में ‘सुरों की उमंग अनूप जलोटा के संग’ कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं से गौ संस्कृति के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया गया।
मुंबई। गुरु नानक खालसा कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में उमा कल्याण ट्रस्ट एवं जलोटा वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित ‘सुरों की उमंग अनूप जलोटा के संग – एक संगीतमय प्रेरणा युवाओं के बीच’ कार्यक्रम ने गौ संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस कार्यक्रम में गाय के प्रति समाज की जिम्मेदारियों को उजागर करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उमा कल्याण ट्रस्ट की मुख्य ट्रस्टी श्रीमती मीना अग्रवाल ने बताया कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बेसहारा गोवंश आज भी सड़कों पर भटकते हुए दिखाई देते हैं। उनके अनुसार, इनकी सेवा और संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्रीमती अग्रवाल ने बताया कि उमा कल्याण ट्रस्ट ने पिछले कई वर्षों से गौ संरक्षण के लिए कई योजनाएँ बनाई हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के राल गांव में स्थित ‘देवरहा बाबा गौ आश्रय स्थल’ शामिल है। यहां लगभग 9,000 बेसहारा गोवंश को आश्रय दिया गया है और उनके लिए चारे, चिकित्सा, देखभाल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी न किसी रूप में गौ सेवा और गौ संस्कृति के संरक्षण में भाग लें। मीना अग्रवाल ने कहा, "गाय केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक मूल्यों का महत्वपूर्ण आधार है।"
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित गोवंश आधारित काव्य प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया और गाय के प्रति अपनी भावनाएं और विचार प्रस्तुत किए। मीना अग्रवाल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि युवा अपनी कविता, कला, साहित्य और रचनात्मकता के माध्यम से भी गौ सेवा और जन जागरूकता में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए गौ संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना और समाज में सकारात्मक जन भागीदारी को बढ़ावा देना था। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि समाज में एक नई सोच और जागरूकता भी लाते हैं।
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Signing off, Team India Twoday - Priya Sharma
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