चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग पर उमड़ी भीड़, 2 अक्टूबर से चल रहा 'ऑपरेशन स्वास्थ्य'
रैबार डेस्क: चौखुटिया अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के खिलाफ ऑपरेशन... The post चौखुटिया: स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरा जनसैलाब, 2 अक्टूबर से जारी है ऑपरेशन स्वास्थ्य appeared first on Uttarakhand Raibar.
चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग पर उमड़ी भीड़, 2 अक्टूबर से चल रहा 'ऑपरेशन स्वास्थ्य'
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कम शब्दों में कहें तो
चौखुटिया के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतरे हैं। स्थानीय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मांग के लिए 'ऑपरेशन स्वास्थ्य' अभियान 2 अक्टूबर से चल रहा है।
रैबार डेस्क: चौखुटिया में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन में ताजा घटनाक्रम ने स्थिति को और उग्र कर दिया है। आंदोलन के 14वें दिन, जनसैलाब ने सड़कों पर उतरकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जोरदार मांग की है। यह आंदोलन अब केवल स्वास्थ्य सेवाओं की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और सरकार की उपेक्षा के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन में बदल गया है।
चौखुटिया अस्पताल की समस्याएं
चौखुटिया अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती, 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की मांग की जा रही है। यह आंदोलन 2 अक्टूबर से लगातार जारी है। पूर्व सैनिक भुवन कठायत जैसे स्थानीय नेता आमरण अनशन पर बैठे थे, जिन्हें जबरन चिकित्सा केंद्र से हटा दिया गया था। ऐसे ही अन्य पूर्व सैनिक, हीरा सिंह पटवाल ने जल सत्याग्रह किया, लेकिन 14 दिनों के संघर्ष के बाद भी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
बंद पड़े व्यापारियों का समर्थन
स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने चौखुटिया में एक विशाल जुलूस निकाला, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। इस प्रदर्शन में सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। स्वास्थ्य आंदोलन को समर्थन देते हुए स्थानीय व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं, जिससे बाजार में सन्नाटा पसर गया। व्यापारी नेताओं ने कहा कि जब तक स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं होंगी, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
लोगों का आक्रोश और उपेक्षा का सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय केवल दिखावे और आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। आंदोलनकारी यह सवाल उठाते हैं कि अगर हजार करोड़ के स्वास्थ्य बजट में से आधा भी वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाता तो स्थिति बेहतर हो सकती थी।
इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताएं मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। युवा छात्र संगठनों का भी इस आंदोलन में समर्थन शामिल हो गया है। आंदोलन की तीव्रता अब और बढ़ रही है, और इसने सरकार को सीधे चुनौती दी है कि वह तेजी से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करे।
जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। क्षेत्र के लोगों का सहयोग इसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन बनाने में मदद करेगा। आम जनता की आवाज को सुनना और उनके मुद्दों का समाधान करना अब सरकार की जिम्मेदारी बन गई है।
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सादर,
Team India Twoday
(सीमा शर्मा)
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