ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु:काशी में साल में एक बार होता है दर्शन; सत्यनारायण मंदिर और गेट 4-बी से एंट्री
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर की दीवार पर स्थापित मां श्रृंगार गौरी का नवरात्र चतुर्थी पर भव्य पूजन और श्रृंगार किया जाएगा। ज्ञानवापी केस की चार वादिनी महिलाओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाएं मां श्रृंगार गौरी की दर्शन-पूजन करेगी। सत्यनारायण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4-बी से सुबह 8.30 बजे से ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के जत्थे को प्रवेश मिलेगा। इस दर्शन-पूजन में महिला दर्शनार्थियों को वरीयता दी जाएगी। सबसे आगे इनकी लाइन होगी, उसके बाद बाकी सभी के दर्शन होंगे। मंगलवार को मंदिर सभागार में ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद की ओर से माता श्रृंगार गौरी के पूजन कार्यक्रम, ज्ञानवापी व्यास जी तहखाना और बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन को एक बैठक हुई। इस बैठक में तय किया गया कि बीते 38 वर्षों से चली आ रही श्रृंगार गौरी के दर्शन की अबाध परंपरा को कायम रखने और उसके दर्शन के मौलिक स्वरूप पर गहन विचार मंथन किया गया। मंदिर प्रशासन ने विगत वर्षों के स्वरूप को ही बनाए रखने का विचार रखा, जिस पर ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के सदस्यों ने सहमति जताई। यह भी तय हुआ कि पुलिस प्रशासन भक्तों के परंपरागत व्यवस्था में सहयोग करेगा। यह भी तय हुआ कि सबसे आगे महिलाएं ही दर्शन करेगी ततपश्चात क्रम निर्धारण से दर्शन पूजन होगा। श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना पर कब रोक लगी दरअसल नियमित दर्शन रोक का मामला 1990 के दशक से जुड़ी हैं। ये वही दौर था जब अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था, उसी दौरान वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की भी शुरुआत हो गई। साल 1992 में अयोध्या बाबरी विध्वंस की घटना के बाद तो 'अयोध्या तो बस झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है' जैसे नारे फिजां में तैरने लगे। माहौल को भांपते हुए वाराणसी का पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया था। समस्या शुरू हुई साल 1993 से, जब सुरक्षाकर्मी पूजा-अर्चना करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के साथ टोका-टाकी करने लगे। इस समस्या ने विकराल रूप धारण किया साल 1996-1997 में नियमित दर्शन कर रोक लगा। कोर्ट के आदेश पर मिला साल में 1 दिन पूजा का अधिकार एक हिंदूवादी संगठन की अर्जी पर कोर्ट ने वासंतिक नवरात्रि के चौथे दिन दर्शन-पूजन करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद श्रृंगार गौरी की साल में एक दिन वासंतिक नवरात्रि की चतुर्थी को दर्शन-पूजन की अनुमति प्रशासन ने दी।

ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु
काशी में साल में एक बार मां श्रृंगार गौरी के दर्शन का आयोजन बहुत धूमधाम से किया जाता है। इस विशेष अवसर पर हर साल अनेक श्रद्धालु यहां आते हैं, जो अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए आए होते हैं। मां श्रृंगार गौरी के इस दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जाता है।
मां श्रृंगार गौरी के बारे में
मां श्रृंगार गौरी की पूजा विशेष रूप से काशी में की जाती है। यह मान्यता है कि जो भी भक्त यहां श्रद्धा और विश्वास से आता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। काशी की पवित्रता और मां के प्रति भक्ति ने इस स्थान को श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान बना दिया है।
दर्शन की प्रक्रिया
श्रद्धालु प्रातः काल से ही मां श्रृंगार गौरी के दरबार में पहुंचने लगते हैं। दर्शन के लिए सत्यनारायण मंदिर और गेट 4-बी से एंट्री करनी होती है। इस समय में भक्तों की बड़ी भीड़ उमड़ती है, इसलिए समय पर पहुंचना आवश्यक होता है। दर्शन के दौरान, भक्त मां के चरणों में श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करते हैं और अपनी अर्जी लगाते हैं।
काशी की महत्ता
काशी, जो कि एक प्राचीन शहर है, ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक मूल्य और गंगा के तट पर स्थित होने के कारण भी इसकी महत्ता है। यहां आने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि लोग आज भी अपनी धार्मिक आस्था को खुद को जोड़े रखने के लिए इस पवित्र स्थान पर आते हैं।
इस वर्ष भी देवी दर्शन को लेकर भक्तों की जोश-खरोश देखने को मिली। भक्तों ने मां श्रृंगार गौरी से प्रार्थना की और इस शुभ अवसर का लाभ उठाया। इस अद्भुत अनुभव को सभी श्रद्धालुओं ने अपने-अपने तरीके से साझा किया।
साल में एक बार होने वाले इन दर्शन का इंतजार श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष रहता है। मां श्रृंगार गौरी के दर्शन से लौटने के बाद भक्तों के चेहरे पर एक अलग ही खुशी और संतोष देखा जा सकता है।
निष्कर्ष
ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के दर्शन का यह अवसर हर भक्त के लिए एक अनमोल अनुभव साबित होता है। इस साल भी मां ने अपने भक्तों को अपने दरबार में बुलाया और उनके दिलों में अमिट छाप छोड़ी। आगे भी भक्त इसी प्रकार मां की महिमा का गुणगान करते रहेंगे।
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