दिल्ली मैराथन में चमोली की ‘फ्लाइंग गर्ल’ भागीरथी बिष्ट ने रजत पदक जीता, उत्तराखंड की शान बढ़ाई

नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली जिले की प्रतिभाशाली धाविका भागीरथी बिष्ट ने 11वें कॉग्निजेंट न्यू दिल्ली मैराथन में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की फुल मैराथन श्रेणी में रजत पदक अपने नाम किया है। ‘फ्लाइंग गर्ल’ के नाम से मशहूर 24 वर्षीय भागीरथी ने 42.195 किलोमीटर की कठिन दौड़ को 2 घंटे 43 मिनट 28 …

Feb 23, 2026 - 09:27
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दिल्ली मैराथन में चमोली की ‘फ्लाइंग गर्ल’ भागीरथी बिष्ट ने रजत पदक जीता, उत्तराखंड की शान बढ़ाई
नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली जिले की प्रतिभाशाली धाविका भागीरथी बिष्ट ने 11वें कॉग्निजेंट न्यू द

दिल्ली मैराथन में भागीरथी बिष्ट की जीत: उत्तराखंड का गौरव

नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली जिले की प्रतिभाशाली धाविका भागीरथी बिष्ट ने 11वें कॉग्निजेंट न्यू दिल्ली मैराथन में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की फुल मैराथन श्रेणी में रजत पदक अपने नाम किया है। ‘फ्लाइंग गर्ल’ के नाम से मशहूर 24 वर्षीय भागीरथी ने 42.195 किलोमीटर की कठिन दौड़ को 2 घंटे 43 मिनट 28 सेकंड में पूरा कर द्वितीय स्थान हासिल किया।

कम शब्दों में कहें तो, भागीरथी की यह सफलता ने न केवल चमोली जिले, बल्कि पूरे उत्तराखंड को गर्वित किया है। उनके अद्वितीय प्रयास और तकनीक ने उन्हें मेधावी धाविकाओं की श्रेणी में शामिल कर दिया है।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में धावकों का उत्साह

रविवार को आयोजित इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की मैराथन में देशभर से हजारों धावकों ने हिस्सा लिया। एलीट महिलाओं की श्रेणी में ठाकर निर्माबेन भारतजी (2:41:15) ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि भागीरथी बिष्ट ने रजत पदक पर कब्जा जमाया। तीसरे स्थान पर अश्विनी मदन जाधव (2:56:59) रहीं।

भागीरथी की मेहनत और रणनीति

चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के वाण गांव की बेटी भागीरथी ने अपनी बेहतरीन रणनीति, संतुलित गति और अटूट धैर्य से सभी को प्रभावित किया। कड़े मुकाबले के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और दौड़ पूरी की। उनकी इस सफलता से चमोली जनपद सहित पूरे उत्तराखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय निवासी, खेल प्रेमी और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी है तथा भविष्य में और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।

कोच की प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीदें

भागीरथी के कोच एवं अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक सुनील शर्मा ने बताया, “भागीरथी ने पूरी दौड़ में संयम और फोकस बनाए रखा। कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने अपनी रणनीति पर अडिग रहकर यह उपलब्धि हासिल की।” उल्लेखनीय है कि भागीरथी पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं।

उनकी उपलब्धियों में ईरान में हाफ मैराथन में जीत और 85वीं ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हाफ मैराथन में स्वर्ण पदक शामिल हैं। अभी, वह पौड़ी जनपद के रासी स्टेडियम में नियमित अभ्यास कर रही हैं।

ओलंपिक का सपना

भागीरथी का सपना ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए मैराथन में पदक जीतना है। उनके प्रयास ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। यह दर्शाता है कि कैसे कड़ी मेहनत और लगन से विश्व स्तर की सफलता हासिल की जा सकती है।

उनकी यह उपलब्धि न केवल चमोली बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। मजबूत इरादे और सिद्धांत के साथ, भागीरथी बिष्ट ने एक नया मापदंड स्थापित किया है।

उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि मेहनत का फल मीठा होता है और सपनों को साकार करने के लिए कोई भी सूरती شرط नहीं है।

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– Team India Twoday (साक्षी शर्मा)

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