देहरादून: धौलास में शेख उल हिंद ट्रस्ट की भूमि विवाद की गहन जांच, गड़बड़ी मिली तो होगी सरकार के पास 20 एकड़ भूमि

रैबार डेस्क: देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में शेख उल हिंद एजुकेशनल ट्रस्ट को दी गई... The post देहरादून: धौलास में शेख उल हिंद ट्रस्ट की जमीन की जांच शुरू, गड़बड़ी पाई गई तो सरकार में निहित होगी 20 एकड़ भूमि appeared first on Uttarakhand Raibar.

Feb 12, 2026 - 09:27
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देहरादून: धौलास में शेख उल हिंद ट्रस्ट की भूमि विवाद की गहन जांच, गड़बड़ी मिली तो होगी सरकार के पास 20 एकड़ भूमि
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देहरादून: धौलास में शेख उल हिंद ट्रस्ट की भूमि विवाद की गहन जांच

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के धौलास में शेख उल हिंद ट्रस्ट को प्राप्त 20 एकड़ जमीन के संदर्भ में सरकार ने जांच शुरू कर दी है। अगर जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो यह भूमि सरकार के पास जा सकती है।

हाल ही में, देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में शेख उल हिंद एजुकेशनल ट्रस्ट को दी गई भूमि विवादों में आ गई है। इस भूमि को शिक्षण संस्थान या बड़ा मदरसा स्थापित करने के उद्देश्य से मौलाना असद महमूद मदनी के ट्रस्ट को आवंटित किया गया था। परंतु हाल के समय में इस पर अवैध प्लॉटिंग की गई है, जिससे प्रशासन की सतर्कता बढ़ गई है।

जांच प्रक्रिया की शुरुआत

बुधवार को, उप-प्रशासनिक अधिकारी (एडीएम) की अध्यक्षता में एक टीम ने धौलास में पहुंचकर विवादास्पद भूमि की जांच शुरू की। प्रशासनिक टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या ट्रस्ट के नाम पर वन भूमि पर कब्जा तो नहीं किया गया। इसके बाद, भूमि के चारों ओर लाल झंडे लगाए गए हैं ताकि इस भूमि पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न की जा सके। इसके अन्य पहलुओं की जांच के लिए राजस्व अभिलेखों को भी खंगाला जाएगा।

जिलाधिकारी का त्वरित एक्शन

जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा की अगुवाई में एक संयुक्त टीम का गठन किया। उन्होंने बताया कि यह जांच मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि स्थलीय निरीक्षण के दौरान भूमि के आवंटन में निर्धारित शर्तों का पालन किया गया था या नहीं।

भूमि की बिक्री और संभावित उल्लंघन

प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि ट्रस्ट ने लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि का विक्रय 15 व्यक्तियों को बड़े भूखंडों के रूप में किया, और इसके बाद उन व्यक्तियों ने इसे 70-80 अन्य लोगों को छोटे भूखंडों में बांटकर बेच दिया। यह स्पष्ट है कि ट्रस्ट को जमीन बेचने की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि भूमि का स्वरूप कृषि भूमि रहेगा।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई गड़बड़ सामने आती है, तो भूमि को तत्काल सरकार के पास वापस ले लिया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में जांच के प्रशासनिक आदेश दे दिए गए हैं।

भूमि आवंटन का इतिहास

इस प्रकरण की शुरुआत साल 2004 में हुई थी, जब मौलाना महमूद असद मदनी ने उस समय के सीएम एनडी तिवारी के समक्ष एक शिक्षण संस्थान या बड़ा मदरसा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। सरकार ने सहमति दी थी और धौलास क्षेत्र में 20 एकड़ भूमि ट्रस्ट को दी गई थी।

हालांकि, इस जमीन पर आईएमए ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि को रोकने की मांग की थी, जिसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। हाल के वर्षों में इस जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की गतिविधियों के आरोप भी लगते रहे हैं, जिससे क्षेत्र में जनसंख्या संतुलन को प्रभावित करने की आशंका जताई जा रही है।

इस पूरी घटना ने स्पष्ट किया है कि गहन जांच की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार के नियमों के उल्लंघन को रोका जा सके। प्रशासन इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।

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सद्गुणों के साथ,

टीम इंडिया टुडे, प्रिया शर्मा

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