देहरादून में गणतंत्र दिवस परेड में सूचना विभाग को मिला प्रथम स्थान - संतोषजनक प्रदर्शन
देहरादून: गणतंत्र दिवस पर देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सूचना विभाग की झांकी ने लगातार तीसरी बार प्रथम स्थान हासिल किया। रजत जयंती व शीतकालीन धार्मिक पर्यटन की थीम पर आधारित झांकी आकर्षण का केंद्र रही। सूचना विभाग की झांकी ने लगातार तीसरी बार प्राप्त किया प्रथम स्थान आज 26 […] The post गणतंत्र दिवस पर देहरादून परेड ग्राउंड में राज्य स्तरीय समारोह, सूचना विभाग की झांकी को मिला प्रथम स्थान first appeared on Vision 2020 News.
देहरादून के परेड ग्राउंड में गणतंत्र दिवस समारोह, सूचना विभाग की झांकी ने जीता गौरव
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में सूचना विभाग की झांकी ने तीसरी बार प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह झांकी रजत जयंती और शीतकालीन धार्मिक पर्यटन की थीम पर आधारित थी।
गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन
आज 26 जनवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में सूचना विभाग की झांकी ने अपने अनूठे प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। राज्य के पच्चीस वर्षों की विकास यात्रा और तीर्थाटन एवं पर्यटन विकास को प्रदर्शित करने वाली इस झांकी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
झांकी की विशेषताएँ
सूचना विभाग की झांकी में प्रथम भाग में गंगा मन्दिर, मुखवा को प्रदर्शित किया गया, जो माँ गंगा का शीतकालीन प्रवास है। झांकी के अग्रिम केबिन में उत्तराखण्ड गठन के 25 गौरवशाली वर्ष प्रदर्शित किए गए। झांकी के ट्रेलर भाग में राज्य को आयुर्वेद के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसके अंतर्गत औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की विशेषताएँ शामिल की गईं।
उत्तराखण्ड की प्रगति को दर्शाने वाली झांकी
झांकी के दूसरे खंड में उत्तराखण्ड की होम स्टे योजना को प्रदर्शित किया गया। इसके पश्चात झांकी में खरसाली में स्थित यमुना मन्दिर को दिखाया गया, जिसे माँ यमुना का शीतकालीन धाम कहा जाता है। झांकी के अंतिम भाग में उठते हुए स्तंभों (पिलर्स) के माध्यम से राज्य की सतत विकास की कहानी को दर्शाया गया।
नए कानूनों का प्रदर्शन और पारंपरिक कला
झांकी के पार्श्व भाग में राज्य में लागू किए गए नए कानूनों का विवरण प्रस्तुत किया गया, जो सुशासन और कानून व्यवस्था को दर्शाता है। इस भाग में ऐपण कला की सजावट ने उत्तराखण्ड की पारंपरिक लोक कला को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ा। इस प्रकार, झांकी ने केवल राज्य के विकास को ही नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित किया।
निष्कर्ष
यह झांकी न केवल उत्तराखण्ड की वर्षों की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ साथ विकास के नए आयाम की ओर बढ़ रहा है। इस सफलता के लिए सूचना विभाग को बधाई।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया India Twodayटीम इंडिया ट्वोडे - आर्या शर्मा
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