देहरादून में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ, विकसित उत्तराखंड 2047 पर चर्चा
देहरादून। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार, सचिवालय में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) का शुभारम्भ हुआ, जिसमें विकसित उत्तराखंड 2047 के दीर्घकालिक विकास एजेंडे पर व्यापक चर्चा की गई। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासकों ने राज्य के भविष्य के विकास मार्ग को सशक्त बनाने के लिए अपने विचार और सुझाव साझा किए। […] The post देहरादून में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन शुरू हुआ, विकसित उत्तराखंड 2047 पर मंथन first appeared on Vision 2020 News.
देहरादून में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ, विकसित उत्तराखंड 2047 पर चर्चा
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में आयोजित दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) ने विकसित उत्तराखंड 2047 के लिए दीर्घकालिक विकास एजेंडा पर महत्वपूर्ण चर्चा शुरू की है। नीति-निर्माताओं और अधिकारियों ने राज्य के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अपने विचार साझा किए हैं।
देहरादून में, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार, सचिवालय में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में विकसित उत्तराखंड 2047 के दीर्घकालिक विकास एजेंडों पर विस्तृत चर्चा की गई। नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासकों ने राज्य के विकास मार्ग को उज्ज्वल बनाने के लिए अपने विचार साझा किए।
मुख्य सचिव का संबोधन
मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने उद्घाटन सत्र में कहा कि AOC एक महत्वपूर्ण मंच है, जहाँ क्षेत्रीय अधिकारियों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने जमीनी चुनौतियों और नीतिगत जरूरतों के बीच तालमेल बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उन्होंने पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य-कल्याण और शहरी विकास को राज्य की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए अनियोजित शहरी विस्तार पर नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने योजनाबद्ध और सतत शहरीकरण को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम की प्रस्तुति
प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने “विकसित उत्तराखंड 2047” के विजन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 2025 से 2047 के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था को सतत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए उच्च-मूल्य कृषि, सेवा क्षेत्र का विस्तार, और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार आवश्यक है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य का GSDP वर्तमान 3.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। इस विकास की दिशा में ठोस नीतियों की आवश्यकता है।
वित्तीय स्थिरता पर जोर
वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर चर्चा करते हुए अनुदानों में कमी, राजस्व वृद्धि में सुस्ती, और खर्चों में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया और विभागों के बीच समन्वय को सुनिश्चित करने की बात कही।
इंफ्रास्ट्रक्चर के सुधार
इंफ्रास्ट्रक्चर एवं मोबिलिटी पर प्रस्तुति देते हुए सचिव पंकज पांडे ने पिछले 25 वर्षों में कनेक्टिविटी में सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने यातायात अवरोध में कमी, टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास और सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
विंटर टूरिज्म पर चर्चा
पर्यटन विभाग की अतिरिक्त सचिव ने विंटर टूरिज्म की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विभिन्न संभावित विंटर टूरिज्म सर्किटों की पहचान करने की जानकारी दी और इसे कार्यान्वित करने के लिए उपयुक्त नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।
आवश्यक संस्थागत ढांचे पर चर्चा
मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि राज्य के तीव्र विकास के लिए कुछ संस्थागत ढांचे विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि मौजूदा चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
सम्मेलन का संचालन
सम्मेलन का संचालन अपर सचिव नवनीत पांडेय ने किया। इस बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, एल. एल. फैनई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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अंत में, यह सम्मेलन उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
Team India Twoday
स्नेहा राव
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