पौड़ी के कमंद गांव में गुलदार ने बुजुर्ग को बनाया अपना निवाला, वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
रैबार डेस्क: पौड़ी में वन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां... The post पौड़ी के कमंद गांव में बुजुर्ग को गुलदार ने बनाया निवाला, वन विभाग की कार्यशैली के खिलाफ लोगों में आक्रोश appeared first on Uttarakhand Raibar.
पौड़ी के कमंद गांव में बुजुर्ग को गुलदार ने बनाया अपना निवाला
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कम शब्दों में कहें तो, पौड़ी जिले के कमंद गांव में एक बुजुर्ग को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया है, जिसके बाद वन विभाग की कार्यशैली के खिलाफ क्षेत्र के लोगों में आक्रोश भड़क गया है। इस घटना ने विशेष रूप से सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित अनेक सवालों को जन्म दिया है।
पौड़ी में वन विभाग एक बार फिर तेज सवालों के घेरे में है। यहां डीएफओ और बड़े अधिकारी लीसा महोत्सव के जश्न का आनंद ले रहे हैं, जबकि इसी दौरान बाघ और गुलदार के हमलों में निर्दोष लोगों की जान जा रही है। शुक्रवार शाम को जिला मुख्यालय के नजदीक बसे कमंद गांव में गुलदार ने 61 वर्षीय मोहन चंद्रम मलासी को निवाला बना लिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया है।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, मोहन चंद्रम मलासी अपने घर के पास बकरियों के लिए चारा लेने गए थे। उसी दौरान करीब 7 बजे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें घसीटते हुए घर से दूर ले गया। जब बुजुर्ग काफी देर तक घर नहीं लौटे, तो उनके परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी खोजबीन शुरू की। देर रात छानबीन के बाद उनका शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिला।
स्थानीय लोगों का आक्रोश
इस घटना के बाद, क्षेत्र के ग्रामीण एकजुट हो गए हैं और प्रशासन तथा वन विभाग की टीम को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा है। शनिवार को स्थानीय लोगों ने शव को नहीं उठाने दिया और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग सिर्फ लीसा महोत्सव में व्यस्त है और गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ग्राम प्रधान साधना देवी ने कहा कि गांव में गुलदार की धमक लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
गुलदार का आतंक
पौड़ी जिले के आसपास के गांवों में गुलदार के आतंक का सिलसिला जारी है। पिछले एक साल में अलग-अलग गांवों में इस गुलदार ने 9 लोगों को अपना शिकार बनाया है। फिर भी स्थिति को सुधारने के लिए वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इस प्रकार की घटनाएं न केवल लोगों की जान को खतरे में डालती हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों में डर और अविश्वास का माहौल भी पैदा करती हैं।
वन विभाग की यह कार्यशैली निश्चित रूप से चिंता का विषय है। लोगों का यह कहना भी है कि उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।
इस मुद्दे पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों की रक्षा का दायित्व सरकार और संबंधित विभागों का है। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई न करना न केवल लापरवाही का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जिम्मेदारी समय पर निभाई नहीं जा रही है।
अंत में, यह स्पष्ट है कि पौड़ी के कमंद गांव में हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यशैली के प्रति लोगों का विश्वास डगमगा दिया है। सभी को उम्मीद है कि इसके बाद प्रशासन इस मुद्दे पर ध्यान देगा और उचित कदम उठाएगा।
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टीम इंडिया टुडे
– संध्या शर्मा
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