बनभूलपुरा में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास के लिए सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने की दी हरी झंडी
रैबार डेस्क: हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर किया... The post बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन से अतिक्रण हटेगा, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, पुनर्वास के लिए सर्वे किया जाए appeared first on Uttarakhand Raibar.
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कम शब्दों में कहें तो, हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की 30 हेक्टेयर भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। यह निर्णय एक लंबे समय से चल रहे मामले में आया है जिसमें विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। इस बहुप्रतीक्षित मामले में सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के साथ ही पुनर्वास की प्रक्रिया की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाला बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस भूमि पर कब्जा करने वाले लोग इसे छोड़ने से जुड़े सवाल नहीं उठा सकते।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह भूमि रेलवे की है और रेलवे ही यह तय करेगा कि इस भूमि का उपयोग कैसे किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए 19 मार्च से पहले एक सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा जिसमें यह निर्धारित किया जाएगा कि करीब 4500 घरों में से किन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने की पात्रता है।
स्थानीय स्थिति और तनाव
बनभूलपुरा, इंदिरा नगर, छोटी लाइन, गफूर बस्ती और लाइन नंबर क्षेत्रों में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण का मामला लंबे समय से विवाद का कारण बना हुआ है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पहले ही इस अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले हल्द्वानी में तनाव उत्पन्न हो गया था, जिस कारण मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के निर्देश
मंगलवार को करीब 55 मिनट तक चली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के हर पहलू पर विचार किया। कोर्ट ने पूछा कि लोग अतिक्रमण वाली जमीन पर रहने के लिए क्यों अड़े हैं, जबकि बेहतर सुविधाओं के साथ उन्हें दूसरी जगह बसाया जा सकता है। जस्टिस बागची ने कहा कि यह स्पष्ट है कि यह भूमि सरकारी है और सरकार ही यह तय कर सकती है कि उस पर क्या बनेगा।
मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के लिए कोई भूमि ली जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मुआवजा देने के बजाय प्रभावितों के लिए आवास योजना के माध्यम से घर बनाए जाएं। प्रभावित लोग दूसरी जगह पर विस्थापन और पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी प्रभावित परिवार पुनर्वास के लिए पात्र हैं या नहीं। इस संदर्भ में सर्वेक्षण 19 मार्च के बाद किया जाएगा।
विस्थापितों के लिए सहायता
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि विस्थापन की स्थिति में सामूहिक रूप से शिफ्ट होने वाले परिवारों को 6 महीने तक प्रति माह 2000 रुपये की सहायता दी जाए। नैनीताल जिला प्रशासन को प्रभावित जनों तक पीएम आवास योजना के लाभार्थी बनने के लिए पत्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, कानून सचिव को इस मामले में पुनर्वास के लिए बनभूलपुरा में कैंप लगाने का निर्देश भी दिया गया है ताकि सभी प्रभावित परिवार योजना के तहत समुचित लाभ प्राप्त कर सकें।
समाप्ति और आगे की प्रक्रिया
कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी प्रक्रियाएँ 31 मार्च से पहले पूरी की जाएँ ताकि व्यावसायिकता और समुचित समाधान निकाला जा सके। मामले की अगली सुनवाई तक रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह निर्णय उन परिवारों के लिए एक उम्मीद लेकर आया है जो वर्षों से इस विवाद का सामना कर रहे थे।
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सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ समय पर पूरी करने की आवश्यकता अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है। इस मामले में तेजी से निर्णय लेने से प्रभावित परिवारों को नई उम्मीद मिलेगी और उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सकेगा।
सादर,
टीम इंडिया ट्वोडे - उदाहरण के लिए, साक्षी शर्मा
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