बीकेटीसी में नियुक्तियों पर सवाल: RTI के खुलासे ने उठाई नई चिंताएँ

देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं कि समिति में पदस्थ एक दर्जाधारी राज्यमंत्री द्वारा नियमों के विपरीत नियुक्तियों और भत्तों का लाभ लिया जा रहा है। सामाजिक …

Apr 27, 2026 - 18:27
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बीकेटीसी में नियुक्तियों पर सवाल: RTI के खुलासे ने उठाई नई चिंताएँ
देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर स

बीकेटीसी में नियुक्तियों पर सवाल: RTI के खुलासे ने उठाई नई चिंताएँ

देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों ने कई विवादों को जन्म दिया है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि एक दर्जाधारी राज्यमंत्री अपने अनियमित नियुक्तियों और भत्तों का लाभ उठा रहा है। RTI 1

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने खुलासा किया है कि बीकेटीसी के उपाध्यक्ष और दर्जाधारी राज्यमंत्री विजय कप्रवाण ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने व्यक्तिगत सहायक के रूप में एक पड़ोसी को नियुक्त किया है, जबकि उनकी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी के कर्मी के रूप में दिखाकर प्रतिमाह 12 हजार रुपये का भुगतान लिया जा रहा है। नेगी के अनुसार, यह व्यवस्था सरकारी दिशा-निर्देशों और नैतिक मानकों के विपरीत है। RTI 4

नेगी का कहना है कि शासन की व्यवस्था के अनुसार दायित्वधारियों को वैयक्तिक सहायक (15 हजार रुपये प्रतिमाह) और चतुर्थ श्रेणी कार्मिक (12 हजार रुपये प्रतिमाह) रखने की अनुमति दी गई है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस नीति का दुरुपयोग किया गया है। बीकेटीसी में पहले से ही पर्याप्त अस्थायी कर्मचारी मौजूद होने के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर ये नियुक्तियाँ की गई हैं। RTI 3

यह भी सामने आया है कि उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण आवास एवं कार्यालय भत्ते के रूप में 25 हजार रुपये प्रतिमाह प्राप्त कर रहे हैं, जबकि उन्हें देहरादून स्थित बीकेटीसी मुख्यालय पर कार्यालय कक्ष उपलब्ध है। आरोपों के अनुसार, उन्होंने अपना आवास और कार्यालय रुद्रप्रयाग में दर्शाकर अतिरिक्त भत्ते का लाभ उठाया है। RTI 2

नेगी ने कहा कि कार्यालय से जुड़ी फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाएं भी समिति के धन से की गई हैं, जो नियमों के उल्लंघन का संकेत देती हैं। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर बीकेटीसी या उससे संबंधित किसी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कम शब्दों में कहें तो, बीकेटीसी की कार्यप्रणाली और उसमें हो रहे कथित अनियमितताओं ने एक बार फिर सरकार और समाज की नजरें उस पर केंद्रित की हैं। इस मामले पर उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है ताकि अधिकारियों के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सके।

इसके अलावा, समाज के हर एक सदस्य को चाहिए कि वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और ऐसे मामलों में संलग्न व्यक्ति या संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करें। इसके लिए सही कदम उठाना बहुत जरूरी है। जानकारी के लिए और अपडेट्स के लिए कृपया हमारी वेबसाइट India Twoday पर जाएं।

यह लेख टीम इंडिया टुडे द्वारा लिखा गया है।

संपर्क: श्रुति वर्मा
टीम इंडिया टुडे

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