“जूडिशियम 2.0” सम्मेलन: न्याय व्यवस्था को समावेशी और सुलभ बनाने में नई पहल - उत्तराखंड मुख्यमंत्री

देहरादून :  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यू. पी.ई.एस बिधौली में उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन “जूडिशियम 2.0 : इंक्लूज़न, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग” में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना सुशासन की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक त्वरित एवं […] The post न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं सुदृढ़ बनाने में “जूडिशियम 2.0” महत्वपूर्ण पहल : मुख्यमंत्री first appeared on Vision 2020 News.

Jun 8, 2026 - 00:27
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“जूडिशियम 2.0” सम्मेलन: न्याय व्यवस्था को समावेशी और सुलभ बनाने में नई पहल - उत्तराखंड मुख्यमंत्री
देहरादून :  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यू. पी.ई.एस बिधौली में उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्

“जूडिशियम 2.0” सम्मेलन: न्याय व्यवस्था को समावेशी और सुलभ बनाने में नई पहल - उत्तराखंड मुख्यमंत्री

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में यू. पी. ई. एस बिधौली में आयोजित उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन “जूडिशियम 2.0 : इंक्लूज़न, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग” में भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि न्याय व्यवस्था को और अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाना सुशासन की मूल भावना है। यह सुनिश्चित करना कि समाज के हर वर्ग को त्वरित और निष्पक्ष न्याय प्राप्त हो, राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।

कम शब्दों में कहें तो, न्याय को पहुँचाना, मानवीय अधिकारों की रक्षा करना और समाज के सभी वर्गों के साथ समान अवसर प्रदान करना यह सब आज के समय में हमारी न्याय व्यवस्था की आवश्यकताएँ हैं। और अधिक अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं.

“जूडिशियम 2.0” का महत्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन की थीम समावेशिता, न्याय तक आसान पहुँच और न्यायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे मुद्दों पर केंद्रित है, जो विकसित भारत के निर्माण के संकल्प से जुड़ी हुई है। एक ऐसा भारत, जहां भौगोलिक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित न होना पड़े। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में, दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए सरल और सुलभ न्याय प्रदान करना अति आवश्यक है।

न्याय की सार्थकता

मुख्यमंत्री धामी ने जोर दिया कि न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में है। उन्होंने बताया कि न्याय में विलंब आम जन के विश्वास को प्रभावित करता है, जिसके कारण न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने में सतत प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

न्यायपालिका का महत्व

मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने एवं समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन की सफलता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास पर निर्भर करती है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। इनमे शामिल हैं भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और ई-कोर्ट्स की प्रणाली। इन प्रक्रियाओं ने न्यायिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया है।

स्थानिक न्याय की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार न्यायालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

सीएम धामी ने उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता को भी एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और सभी नागरिकों को समान न्याय प्रदान करना है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि “जूडिशियम 2.0” सम्मेलन न्याय व्यवस्था को और अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा, और यह उत्तराखंड के विकास के सपने को साकार करने में भी सहायक होगा।

जानकारी में आये इस सम्मेलन से जुड़ी नीतियों और कार्यक्रमों पर गहन चर्चा की गई और न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए, जिससे आने वाले दिनों में सभी वर्गों को न्याय प्राप्त करने में सरलता होगी।

इस प्रकार, “जूडिशियम 2.0” न केवल एक सम्मेलन है, बल्कि यह उत्तराखंड की न्याय प्रणाली में योगदान देने का एक मजबूत प्रयास है, जो आने वाले समय में न्यायिक प्रक्रिया को और भी मजबूत करेगा।

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सदभावनाओं के साथ,

टीम इंडिया ट्वोडे, साक्षी शर्मा

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