अल्मोड़ा में बंदरों के बढ़ते आतंक ने दीवंगों और बच्चों को बनाया शिकार

रैबार डेस्क: अल्मोड़ा जनपद में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, सभी... The post अल्मोड़ा में बंदरों का आतंक, बुजुर्ग दिव्यांग को घर में बुरी तरह काटा, 2 किलोमीटर तक कंधे पर लाई महिलाएं appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jul 18, 2026 - 18:27
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अल्मोड़ा में बंदरों के बढ़ते आतंक ने दीवंगों और बच्चों को बनाया शिकार
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अल्मोड़ा में बंदरों के बढ़ते आतंक ने दीवंगों और बच्चों को बनाया शिकार

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कम शब्दों में कहें तो, अल्मोड़ा जिले में बंदरों के लगातार बढ़ते आतंक से सभी वर्ग के लोग बेहद परेशान हैं। हाल ही में एक बुजुर्ग दिव्यांग व्यक्ति पर बंदरों ने हमला करके उसके लिए संकट उत्पन्न कर दिया, जबकि अन्य बच्चे भी इन जानवरों का शिकार बन रहे हैं।

अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट क्षेत्र के तल्ली कहाली गाँव में एक 75 वर्षीय नेत्रहीन श्रद्धालु, केशव दत्त, अपने गोठ के पास झाड़ू लगा रहे थे तभी अचानक बंदरों ने उन पर हमला कर दिया। इस हादसे में केशव दत्त की जाँघ और पैरों को बुरी तरह काट दिया गया। जब वह लहूलुहान स्थिति में थे तो उन्हें उपचार हेतु अस्पताल लाने में भी कई बाधाएँ उत्पन्न हुईं।

जानकारी के अनुसार, जब केशव दत्त को अस्पताल पहुँचाने का समय आया, तो उस वक्त गाँव के आसपास केवल एक पुरुष मौजूद था। इसलिए गांव की महिलाओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कंधों पर केशव दत्त को लेकर पक्की सड़क तक पहुंचाया। इससे स्पष्ट होता है कि बंदरों का आतंक यहाँ के निवासियों के लिए एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।

हालात की गंभीरता

यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में बंदरों ने हमला किया है। इससे पहले, शुक्रवार को अल्मोड़ा के रानीधारा क्षेत्र में एक स्कूल जा रहा बच्चा भी बंदरों के हमले का शिकार बना था। इसी तरह, स्याल्दे विकासखंड के वल्मरा क्षेत्र में एक 12 वर्षीय बच्चा, भावेश, जब अपने घर के बाहर खेल रहा था तो उसे भी बंदरों ने काट लिया।

इन घटनाओं के बाद, स्थानीय निवासी यह चिंतित हैं कि इस प्रकार के हमलों से जीवित रहना कितना कठिन हो गया है। बंदरों के प्रति प्रशासन की असंवेदनशीलता ने लोगों में भय का माहौल बना दिया है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

क्या है समाधान?

बंदरों के आतंक को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासनों को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। जन जागरूकता के माध्यम से ग्रामीणों को बंदरों के साथ व्यवहार करने की सही जानकारी दी जानी चाहिए। इसके अलावा, वन विभाग को इन स्थितियों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और बंदरों को मानव बस्तियों से दूर रखने के लिए प्रभावी उपायों को लागू करना चाहिए।

साथ ही, यह जरूरी है कि लोग भी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहें और ऐसे स्थानों से दूर रहें जहाँ बंदरों की अधिकता हो। जब भी कोई बंदर दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें।

इस संकट का सामना करने के लिए एकता में ही शक्ति है। जैसे कि गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर केशव दत्त की मदद की, उसी प्रकार सभी को एक-दूसरे का सहारा बनकर रहना चाहिए।

अंत में, हम यह कह सकते हैं कि बंदरों का यह आतंक केवल एक समस्या नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि हमें अपने परिवेश और उसकी सुरक्षा के प्रति सजग रहना होगा।

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सादर,

टीम इंडिया टुडे (स्नेहा शर्मा)

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