भाजपा की टिकट कटने की चिंता: जंतर मंतर से देहरादून तक, 32 विधायकों के भविष्य पर संकट
रैबार डेस्क: जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और हाल में उपचुनाव के नतीजों... The post जंतर मंतर टु देहरादून वाया बांकीपुर,भाजपा के 32 विधायकों के कट सकते हैं टिकट, CM को भी सेफ सीट की तलाश appeared first on Uttarakhand Raibar.
भाजपा की टिकट कटने की चिंता: जंतर मंतर से देहरादून तक, 32 विधायकों के भविष्य पर संकट
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कम शब्दों में कहें तो भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट ने राज्य में हलचल मचा दी है। 32 विधायकों के टिकट काटने की संभावना के बीच मुख्यमंत्री के लिए सुरक्षित सीट की तलाश जारी है।
रैबार डेस्क: हाल ही में जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा के लिए चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं। जब भाजपा बिहार की बांकीपुर सीट से चुनाव हारने का सामना कर रही थी, उत्तराखंड भाजपा का एक आंतरिक सर्वे भी उसकी नींद उड़ा रहा था।
इस आंतरिक सर्वेक्षण में 70 सीटों पर कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता से आगामी चुनावों को लेकर फीडबैक लिया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ी है। अगर पार्टी ने इन विधायकों को टिकट देने का निर्णय लिया तो उसे संभावित रूप से विपक्ष की सीटों पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया है कि राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा अपेक्षाकृत कम है, बल्कि नाराजगी मुख्य रूप से विधायकों के कामकाज को लेकर है। भाजपा के 10 साल के शासन के दौरान कई विकास कार्य हुए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध की आवाजें बढ़ी हैं। आंतरिक विवाद, प्रशासनिक ढिलाई और युवाओं में असंतोष की भावना भी बेतरतीब देखी गई है। इसलिए, 2027 के चुनाव में भाजपा को इन 32 विधायकों के टिकट काटने या स्थान बदलने के बारे में गंभीरता से विचार करना होगा।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पिछली बार भाजपा जिन 23 चुनावी सीटों पर हार गई थी, उनमें से 10 के मुकाबले थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं। पार्टी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भी सुरक्षित सीट की तलाश शुरू कर दी है, ताकि वह बेफिक्र होकर चुनाव प्रचार कर सकें। गौरतलब है कि हाल ही में धामी ने चंपावत सीट पर उपचुनाव में जीत हासिल की थी, जबकि खटीमा सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
सूत्रों का कहना है कि राज्य में विपक्ष की मजबूती या कमजोरी के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता है; मुख्य मुद्दा स्थानीय स्तर पर की नाराजगी से जुड़ा है। इतिहास में, कांग्रेस के दिवंगत नेता भुवन चंद खंडूरी के समय भी भाजपा को स्थानीय नाराजगी के कारण सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। इस बार भाजपा कांग्रेस को हल्के में नहीं लेगी।
भाजपा उत्तराखंड कोर ग्रुप की बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल. संतोष और अन्य महत्वपूर्ण नेता शामिल होंगे। इस बैठक में आंतरिक सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस सर्वेक्षण के आधार पर टिकटों का बंटवारा किया जाता है। यदि सचमुच 32 टिकट काटे गए, तो पार्टी में असंतोष तो उभरेगा ही।
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सादर, टीम इंडिया टुवडे - प्रियंका मेहरा
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