मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीराम कथा समापन समारोह में की भागीदारी
हरिद्वार । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को प्रेमनगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन धरा पर उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक सुख और आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने पूज्य मोरारी बापू का हृदय से आभार […]
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीराम कथा समापन समारोह में की भागीदारी
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में पूज्य मोरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन समारोह में भाग लिया और श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित किया कि वे भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।
हरिद्वार में आयोजित इस भव्य समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस पावन धरा पर उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक सुख और आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने पूज्य मोरारी बापू का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्हें केवल कथा का वाचक नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों के जीवित अनुयायी बताया।
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि आज विश्व भयंकर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे कि युद्ध, हिंसा और आतंकवाद। ऐसे में "वसुधैव कुटुम्बकम्" का संदेश पूरी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में उभरा है। उन्होंने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर प्रकाश डाला और कहा कि उत्तराखंड सरकार देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापना के संकल्प के प्रति प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक यात्राएँ इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। चारधाम यात्रा के दौरान पिछले रिकॉर्ड टूट गए हैं, जहाँ 45 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इसके अलावा, हेमकुंड साहिब यात्रा में डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था प्रकट की।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि 5 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल को रवाना करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यह उत्तराखंड में बेहतर बुनियादी ढांचे और श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ 2027 के लिए दिव्य, भव्य और सुरक्षित आयोजन का संकल्प दोहराया। इसमें उन्होंने उल्लेख किया कि कुंभ केवल आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व है। राज्य सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक गरिमा को संरक्षित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने और समाज के कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया। इस समारोह में परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री सुनील सैनी और अन्य विद्वजनों की उपस्थिति रही।
अपनी बात समाप्त करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के आशीर्वाद के साथ, उत्तराखंड को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना चाहिए।
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— टीम इंडिया टुडेज
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