रेलवे सुरंग ब्लास्टिंग के खिलाफ ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, जल संकट और पेयजल की स्थिति में संकट

रुद्रप्रयाग। रेलवे सुरंग निर्माण में की जा रही ब्लास्टिंग के विरोध में चिवंई, शिवानंदी तोक, कलना, नगरासू और घोलतीर के ग्रामीणों ने 19 जुलाई से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू करने का ऐलान किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, जिससे पेयजल …

Jul 7, 2026 - 00:27
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रेलवे सुरंग ब्लास्टिंग के खिलाफ ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, जल संकट और पेयजल की स्थिति में संकट
रुद्रप्रयाग। रेलवे सुरंग निर्माण में की जा रही ब्लास्टिंग के विरोध में चिवंई, शिवानंदी तोक, कलना,

रेलवे सुरंग ब्लास्टिंग के खिलाफ ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना

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कम शब्दों में कहें तो, रुद्रप्रयाग के विभिन्न गांवों के निवासी 19 जुलाई से रेलवे सुरंग निर्माण के लिए हो रही ब्लास्टिंग के कारण सूखते जल स्रोतों के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने जा रहे हैं।

रुद्रप्रयाग। रेलवे सुरंग निर्माण की प्रक्रिया में हो रही ब्लास्टिंग के खिलाफ चिवंई, शिवानंदी तोक, कलना, नगरासू और घोलतीर के ग्रामीणों ने 19 जुलाई से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि करीब दो महीने से लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण उनके प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, जिससे न केवल पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है, बल्कि सिंचाई के लिए आवश्यक पानी की भी किल्लत हो रही है।

संकट के मुख्य कारण

ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और उप जिलाधिकारी को 25 मई 2026 को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्होंने समस्या के समाधान की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन से रेलवे साइट गेट पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति भी प्राप्त कर ली गई है।

धरने का आयोजन

सोमवार, 19 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे से रेलवे साइट गेट पर इस धरने की शुरुआत की जाएगी। ग्रामीणों ने इस आंदोलन में भागीदार बनने के लिए क्षेत्र के सभी निवासियों से अपील की है, ताकि उनकी आवाज को अधिक से अधिक शक्तिशाली बनाया जा सके।

मुख्य मांगें

धरना कर रहे ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रेलवे सुरंग की ब्लास्टिंग तुरंत बंद की जाए।
  • प्रभावित गांवों में पेयजल और सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • सूख चुके प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।

यह धरना स्थानीय निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण चरण है, जो उनके जीवन, जल स्रोतों और कृषि पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इस संकट को समझते हुए, प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि स्थानीय समाज का यह प्रयास इस बात का प्रतीक है कि जब लोग अपने अधिकारों के लिए एकत्रित होते हैं, तो वे बदलाव ला सकते हैं। ऐसे में यह देखना आवश्यक होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कैसे करता है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया India Twoday पर जाएँ।

सादर,

टीम इंडिया टुडे, दीप्ति शर्मा

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