रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि में डोली यात्रा पर हंगामा, स्थानीय लोगों ने तोड़ी गेट, हजारों पहुंचे मैदान में
रैबार डेस्क: रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में गुरुवार को स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच तनातनी... The post रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि में भारी हंगामा, स्थानीय लोगों ने तोड़ा स्टेडियम का गेट, डोली के साथ हजारों ने किया मैदान में प्रवेश appeared first on Uttarakhand Raibar.
रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि में डोली यात्रा पर हंगामा, स्थानीय लोगों ने तोड़ी गेट, हजारों पहुंचे मैदान में
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कम शब्दों में कहें तो, रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में गुरुवार को डोली यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच जबरदस्त विवाद उत्पन्न हो गया। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में स्थानीय श्रद्धालुओं ने गेट तोड़कर हजारों की संख्या में मैदान में प्रवेश किया।
गुरुवार को मकर संक्रांति के खास अवसर पर, अगस्त्यमुनि में अगस्त्य ऋषि की डोली को मंदिर से गद्दीस्थल की ओर ले जाना बहुत मुश्किल हो गया। गेट के अवरोध के कारण डोली मैदान के भीतर प्रवेश नहीं कर पा रही थी। इस पर स्थानीय लोगों में भड़के गुस्से ने स्थिति को बुरा बना दिया। लोग धरने पर बैठ गए, और गेट के ऊपरी हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिया, जिसके बाद ही डोली भीतर प्रवेश कर पाई।
डोली यात्रा का महत्व
अगस्त्य ऋषि की डोली यात्रा हर 15 साल में आयोजित की जाती है, जिसका स्थानीय लोगों के लिए गहरा धार्मिक महत्व है। डोली समिति के अधिकारियों ने प्रशासन को इस आयोजन के बारे में पूर्व में सूचना दी थी, लेकिन प्रशासन ने आवश्यक प्रबंध नहीं किए। यह बताया गया है कि वर्तमान में अगस्त्यमुनि मैदान में खेल विभाग द्वारा गेट का निर्माण किया जा रहा है, जिसे स्थानीय लोग अवैध करार देते हैं।
स्थानीय लोगों का विरोध
लोगों का कहना है कि यह भूमि अगस्त्य ऋषि के मंदिर की है और प्रशासन की ओर से किए जा रहे निर्माण कार्य न केवल उनकी धार्मिक आस्था के खिलाफ है, बल्कि यह उनकी संस्कृति को भी छिन्न-भिन्न कर रहा है। दरअसल, प्रशासन के लापरवाह रवैये के कारण ही स्थिति बिगड़ी। बुधवार को भी जब डोली यहां पहुंची थी, तो गेट के बंद होने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा था। इससे आक्रोशित श्रद्धालुओं ने हाईवे पर लंबा जाम लगा दिया और अपनी धार्मिक आस्था के लिए आवाज उठाई।
किस प्रकार हल हुई स्थिति
गेट को तोड़ने के बाद हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मैदान में प्रवेश किया और मुनि महाराज की जय के नारे लगाए। इस हंगामे के चलते केदारनाथ हाईवे पर तीन घंटे से बंद जाम भी खुल गया, जिससे वाहन चालकों को राहत मिली। स्थानीय लोगों की मांग है कि उनकी आवाज को सुनकर प्रशासन उचित कदम उठाए और उनके धार्मिक अधिकारों का सम्मान करे।
इस घटना से स्पष्ट है कि जब भी धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा कोई आयोजन होता है, तो प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो ऐसे विवादों से बचा जा सकता था।
अंत में, स्थानीय लोगों का यह हंगामा सिर्फ एक गेट को तोड़ना नहीं था, बल्कि यह उनके धार्मिक अधिकारों और आस्था की रक्षा का आंदोलन था। उम्मीद की जाती है कि प्रशासन भविष्य में इस तरह की घटनाओं से सीख लेगा और स्थानीय समुदाय के साथ बातचीत के माध्यम से अपने समाधान खोजेगा।
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इस लेख को लिखा है, सुरसेना कुमारी, Team India Twoday
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