रुद्रप्रयाग: ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से ग्रामीण महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंगों में सशक्त

रुद्रप्रयाग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को  रुद्रप्रयाग जिले में निरंतर सफलता मिल रही है। इस अभियान के तहत स्थानीय महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में जनपद रुद्रप्रयाग में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों […] The post रुद्रप्रयाग: ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से सशक्त हो रहीं ग्रामीण महिलाएं, प्राकृतिक तरीके से बना रहीं हर्बल कलर first appeared on Vision 2020 News.

Mar 2, 2026 - 18:27
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रुद्रप्रयाग: ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से ग्रामीण महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंगों में सशक्त
रुद्रप्रयाग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘वोकल

रुद्रप्रयाग: ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से ग्रामीण महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंगों में सशक्त

कम शब्दों में कहें तो, रुद्रप्रयाग में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत महिला स्वयं सहायता समूह स्थानीय हर्बल रंगों का उत्पादन कर रहें हैं, जिससे उन्हें स्वरोजगार की नई दिशा मिली है।

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रुद्रप्रयाग: पीएम नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शुरू किया गया ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान रुद्रप्रयाग जिले में लगातार सफलता की नई कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है।

महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रियता

इस अभियान के तहत जनपद रुद्रप्रयाग की महिलाओं ने स्वयम सहायता समूहों के माध्यम से प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों का निर्माण शुरू किया है। रंगों के उत्पादन के साथ-साथ वे होली के लिए मिठाई गुजिया भी बना रहीं हैं। यह गतिविधि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर रही है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है।

प्राकृतिक रंगों का निर्माण

रुद्रप्रयाग जिले के जवाड़ी, कुमोली, मायकोटी, मेदनपुर एवं ऊखीमठ क्षेत्र की महिलाओं ने अपने गांवों में स्थानीय तत्वों का इस्तेमाल कर प्राकृतिक रंगों का निर्माण किया है। जैसे कि पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला, चुकंदर से गुलाबी और लाल रंग, तथा गेंदा फूल से केसरिया रंग तैयार कर रही हैं। इन प्राकृतिक रंगों की बाजार में खास मांग बनी हुई है, खासकर होली पर्व के दृष्टिगत।

Natural Colors Production

स्वदेशी उत्पादों की पहचान

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से महिलाओं को प्राकृतिक रंग निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण से प्रेरित होकर, अब महिलाएं अपने गांवों में हर्बल रंगों का निर्माण कर रही हैं। इससे उनकी आजीविका सशक्त हुई है और यह स्वदेशी उत्पादों के लिए एक नए रास्ते का निर्माण कर रहा है।

हर्बल रंगों का उपयोग करने की अपील

इस अवसर पर, समूह की महिलाओं ने जनता से अपील की है कि वे होली के त्योहार पर स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ उनकी आजीविका में वृद्धि होगी बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

जवाड़ी गांव की संगीता और मोनिका ने कहा कि रंग बनाने से उन्हें घर बैठे रोजगार मिला है और लोग उनके बनाये रंगों को पसंद कर रहें हैं। उनके इस प्रयास से न केवल महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी पहचान मिल रही है।

इस प्रकार, ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ग्रामीण महिलाओं के लिए सफलता और आत्मनिर्भरता की ओर एक नया कदम साबित हो रहा है।

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— टीम इंडिया टुडे (सीता शर्मा)

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