श्री बदरीनाथ धाम में कपाट बंद की प्रक्रिया, 25 नवंबर को होगा शीतकालीन समापन

श्री बदरीनाथ धाम यात्रा 2025 • श्री बदरीनाथ धाम में कपाट बंद की प्रक्रिया के तहत पंच पूजाएं कल शुक्रवार से शुरू होंगी • 25 नवंबर को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे। • *कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित बीकेटीसी पदाधिकारी सदस्य मौजूद रहेंगे।* श्री बदरीनाथ/ ज्योर्तिमठ/ गोपेश्वर: …

Nov 21, 2025 - 00:27
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श्री बदरीनाथ धाम में कपाट बंद की प्रक्रिया, 25 नवंबर को होगा शीतकालीन समापन
श्री बदरीनाथ धाम यात्रा 2025 • श्री बदरीनाथ धाम में कपाट बंद की प्रक्रिया के तहत पंच पूजाएं कल शुक्र

श्री बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने की तैयारी शुरू

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कम शब्दों में कहें तो, 25 नवंबर को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं। इस प्रक्रिया की शुरुआत 21 नवंबर से पंच पूजाओं के साथ होगी।

धाम में कपाट बंद की प्रक्रिया का आरंभ

श्री बदरीनाथ धाम, जो धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्व का केन्द्र है, का कपाट बंद होने का कार्य 25 नवंबर को अपराह्न 2 बजकर 56 मिनट पर निर्धारित किया गया है। इसके लिए विभिन्न ceremonial प्रक्रियाएं, जिनमें पंच पूजाएं शामिल हैं, 21 नवंबर से शुरू हो जाएँगी।

पंच पूजाओं का विवरण

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि कपाट बंद की प्रक्रिया की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होगी, जो 21 नवंबर को होगी। पूजा के बाद, गणेश जी के कपाट भी बंद कर दिए जाएंगे।

इसके बाद 22 नवंबर को आदि केदारेश्वर और शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे। 23 नवंबर को खडग–पुस्तक पूजन होगा और वेद ऋचाओं का वाचन भी समाप्त होगा। अंतिम चरण में, 24 नवंबर को मां लक्ष्मी जी को कढाई भोग अर्पित किया जाएगा।

महत्वपूर्ण तिथियों का उल्लेख

ध्यान दें, शीतकालीन चरण की शुरुआत 26 नवंबर को होगी जब श्री कुबेर जी, उद्धव जी और रावल जी सहित आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेगी। इसके बाद, 27 नवंबर को गद्दी श्री नृसिंह मंदिर, जोशीमठ पहुंच जाएगी।

धार्मिक समारोह की रौनक

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को भव्य सजावट से सजाया जाएगा। बीकेटीसी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे, जिससे समारोह का महत्व और बढ़ जाएगा।

विज्ञापन का महत्व

इस प्रकार यह आयोजन धर्म और आस्था का प्रतीक होते हुए भी, श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा अनुभव होगा। इस अवसर पर मंदिर में भक्तों की बडी संख्या में उपस्थिति की उम्मीद है।

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धार्मिक आस्था के इस महोत्सव में सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाता है कि वे इस अद्वितीय अवसर का हिस्सा बनें।

सादर, टीम इंडिया टुडे - रेखा शर्मा

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