अंकिता भंडारी हत्याकांड: चार साल बाद भी न्याय अधूरा, VIP का नाम उजागर करने की आवश्यकता
देहरादून : अंकिता भंडारी हत्याकांड को चार साल पूरे होने पर पूर्व सैनिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने मामले में कथित VIP की पहचान सार्वजनिक करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की। चार साल बाद भी अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिलने का आरोप वक्ताओं ने […] The post चार साल बाद भी अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिलने का आरोप, VIP का नाम उजागर करने की मांग first appeared on Vision 2020 News.
अंकिता भंडारी हत्याकांड: चार साल बाद भी न्याय अधूरा, VIP का नाम उजागर करने की आवश्यकता
देहरादून : अंकिता भंडारी की हत्या को चार साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। इस घटना के चार साल पूरे होने पर पूर्व सैनिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने मामले में कथित VIP की पहचान सार्वजनिक करने और पूरी प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कम शब्दों में कहें तो, अंकिता के मामले में न्याय की राह में आ रही बाधाएं और VIP की संदिग्ध भूमिका पर उठे सवाल उनकी याद को ताजा करते हैं। इसके अलावा, सरकारी कार्रवाई की कमी भी समाज में गहरी चिंता का कारण बन गई है। अधिक अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट देखें।
चार साल बाद भी अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिलने का आरोप
वक्ताओं का कहना है कि उत्तराखंड की जनता आज भी अंकिता को नहीं भूली है। पहाड़ की इस बेटी ने अपनी अस्मिता के लिए बलिदान दिया, लेकिन चार साल बाद भी उसके परिवार को न्याय का इंतज़ार है। वे आरोप लगाते हैं कि अंकिता ने अपनी जान के लिए खतरा महसूस किया और यह भी कहा था कि VIP को विशेष सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा था। इसी संदर्भ में सवाल उठता है कि सरकार ने उसके अंतिम बयान पर गंभीरता से ध्यान क्यों नहीं दिया।
वक्ताओं ने मांग की है कि इस मामले में VIP से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। यदि जांच के दौरान किसी की भूमिका सामने आती है, तो सरकार को उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। न्याय की मांग में उठे ये सवाल केवल अंकिता के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो न्याय की चाहत रखता है।
VIP का नाम उजागर करने की मांग
आंदोलन में भाग ले रहे वक्ताओं ने अंकिता के अंतिम संस्कार के समय को लेकर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार देर शाम कराया गया, जो कि धार्मिक परंपराओं के खिलाफ था। माता-पिता ने इस मामले में न्याय की तत्परता पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की पारदर्शिता की आवश्यकत पर बल दिया ताकि परिवार को सही न्याय मिल सके।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व सैनिकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड सैनिक बहुल राज्य है और सीमाओं पर तैनात जवानों के परिवारों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। यदि किसी लापरवाही या अन्याय का शिकार एक बेटी होती है, तो यह समाज के लिए गलत संदेश भेजता है।
उर्मिला सनावर के दावे का भी किया गया जिक्र
प्रदर्शन के दौरान उर्मिला सनावर के दावे का उल्लेख भी किया गया। वक्ताओं का कहना है कि उर्मिला ने कथित VIP के नाम उजागर करने का दावा किया था, लेकिन सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सरकार से अपील की कि अंकिता हत्याकांड में सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए और VIP की भूमिका स्पष्ट की जाए।
यदि सरकार ने मामले में पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो वक्ताओं ने चेतावनी दी कि आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह स्पष्ट है कि अंकिता भंडारी की याद एक संघर्ष की कहानी है जो न्याय की उम्मीद बनकर जीवित है।
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