उत्तराखंड पुलिस में बड़ा उलटफेर: पौड़ी SSP द्वारा ट्रांसफर पर IG ने लगाई रोक
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस में एक अनोखी घटना ने विभाग के अंदर काफी हलचल मचा दी है। पौड़ी गढ़वाल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सर्वेश पंवार द्वारा इंस्पेक्टरों और दारोगाओं (उपनिरीक्षकों) के किए गए तबादलों पर गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) राजीव स्वरूप ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जानकारी के अनुसार, …
उत्तराखंड पुलिस में बड़ा उलटफेर: पौड़ी SSP द्वारा ट्रांसफर पर IG ने लगाई रोक
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड पुलिस में हाल ही में एक असामान्य घटना घटी है, जब पौड़ी गढ़वाल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सर्वेश पंवार द्वारा जारी ट्रांसफर आदेशों पर गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) राजीव स्वरूप ने रोक लगा दी है।
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस में हलचल का एक नया दौर शुरू हो गया है। SSP सर्वेश पंवार ने अपने प्रशासन के तहत कई इंस्पेक्टरों और उपनिरीक्षकों (दारोगाओं) के ट्रांसफर के आदेश जारी किए थे। लेकिन अचानक IG राजीव स्वरूप ने इन आदेशों पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि यह रोक नियमों के पालन न होने के कारण लगाई गई है।
IG ने कहा कि विभागीय प्रक्रियाओं का पालन बेहद आवश्यक है, और किसी भी प्रकार के ट्रांसफर के लिए नियमों का पूर्ण रूप से पालन होना चाहिए। उनके इस निर्णय ने न केवल पुलिस विभाग में हलचल पैदा की है, बल्कि इस विषय पर चर्चा का बाजार भी गर्म कर दिया है।
ट्रांसफर के पीछे की वजह और पुलिस विभाग की दृष्टि
इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या स्थानीय SSP को ट्रांसफर आदेश जारी करने में स्वतंत्रता होनी चाहिए, या इसकी प्रक्रिया को उच्च अधिकारियों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। आमतौर पर यह देखा गया है कि SSP द्वारा जारी ट्रांसफर आदेश पर IG या अन्य उच्च अधिकारियों द्वारा रोक लगाना असामान्य है, लेकिन इस बार मामला गंभीर था।
IG के इस फैसले से कुछ इंस्पेक्टर और दारोगा राहत महसूस कर रहे हैं। इसमें वो अधिकारी शामिल हैं जो लंबे समय से एक ही पोस्ट पर तैनात थे और ट्रांसफर की अपेक्षा कर रहे थे। वहीं, कुछ नए अधिकारियों को भी जिम्मेदारियां सौंपी गईं थीं, जो अचानक इस प्रक्रिया से बाहर हो गए।
विभाग में चर्चा और भविष्य की संभावनाएँ
इस निर्णय ने निश्चित रूप से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच में चर्चा को जन्म दिया है। कुछ अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विभाग में कई अधिकारी इस मार्गदर्शन को एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं, ताकि ट्रांसफर की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और प्रभावशाली हो सके।
बातचीत का विषय अब यह है कि आगे चलकर IG का निर्णय कैसे आगे बढ़ता है। क्या इस फैसले के बाद विभाग अपनी प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करेगा? या फिर यह एक अस्थायी कदम होगा? इन सभी सवालों के जवाब अभी भी अपेक्षित हैं।
पुलिस विभाग में कई अधिकारी हैं जो लंबे समय से थाना-चौकी प्रभारी बनने की आस लगाए बैठे थे। उनके लिए यह एक नवीनतम स्थिति है, जो उन्हें अपने करियर में नई संभावनाओं के लिए पुनर्विचार करने की प्रेरणा दे सकती है।
इस क्रम में, उम्मीद जताई जा रही है कि विभागीय प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिकतम सुसंगतता और पारदर्शिता से चलाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं हो।
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सादर,
टिम इंडिया टुडेश, अंजलि शर्मा
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