उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार: विधायकों की हसरतों पर पानी कैसे फिरा?
एस. एस. तोमर धामी 2.0 सरकार के चार साल पूरे होने जा रहे हैं। इन चार वर्षों में सरकार ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए जो देश के लिए नजीर बने। अब 2025 खत्म होने को है लेकिन चार वर्षों के इस कार्यकाल में सबसे ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार की रही लेकिन ये विस्तार हुआ ही […] The post विधायकों के अरमानों पर कैसे फिरा पानी?, मंत्रिमंडल विस्तार के पर्दे के पीछे की कहानी ! first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार: विधायकों की हसरतों पर पानी कैसे फिरा?
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में धामी 2.0 सरकार के चार वर्षीय कार्यकाल में मंत्रिमंडल विस्तार की आस में विधायकों की उम्मीदें टूट रही हैं। विस्तार की चर्चाएँ तो हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई का न होना एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
धामी 2.0 सरकार का चार साल का सफर
उत्तराखंड की धामी 2.0 सरकार, जो कि अपने चार साल पूरे करने जा रही है, ने इस दौरान कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। लेकिन इस पूरी अवधि के दौरान सबसे बड़ी चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार की रही है। अब 2025 नजदीक आ रहा है, लेकिन यह विस्तार अब तक नहीं हो पाया है।
इन्तेहां हो गई इंतजार की, आई ना खबर मंत्रिमंडल विस्तार की
मंत्रिमंडल विस्तार की दिलचस्पी इतनी बढ़ गई है कि विधायकों को यह महसूस होने लगा है कि उनकी बारी शायद इस बार न आए। महीनों और वर्षों के इंतजार के बाद भी कोई सकारात्मक खबर नहीं आई है। इस वक्त विधायकों की मानसिक स्थिति ऐसी हो गई है कि वे सपनों में भी यही गुनगुनाते नजर आते हैं: 'इन्तेहां हो गई इंतजार की, आई ना खबर मंत्रिमंडल विस्तार की।'
विधायकों के अरमानों पर पानी फिर रहा है
बीजेपी में मंत्री बनने की आस पाले विधायक अब निराश हो रहे हैं। चार साल में उन्होंने कई सर्दी-गर्मी, त्यौहार और मौके देख लिए, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार अब तक केवल चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनावी मौसम के बीच संगठन भी सक्रिय है, लेकिन वहीं मंत्रिमंडल के विस्तार का कोई इरादा नहीं दिखाई दे रहा है।
कब आएगा मंत्रिमंडल विस्तार का चांद?
कभी लोकसभा चुनाव के बाद तो कभी बिहार चुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की बातें की गईं, लेकिन मजदूरों की तरह विधायकों ने केवल तारीख का इंतजार किया। पिछले साल दिवाली से पहले इस बात की चर्चा थी कि विधायकों के सपने पूरे हो सकते हैं, लेकिन अब तो नया साल भी आ गया है और स्थिति जस की तस है। अब तो यह कहने में कोई संकोच नहीं कि विधायकों का सपना सिर्फ एक सपना ही रह गया है।
मंत्रिमंडल विस्तार के अंगूर अब भी मीठे नहीं हो सके
भाजपा ने उत्तराखंड में 70 में से 47 विधायकों के साथ अब तक मंत्रिमंडल विस्तार नहीं किया है। इस आलम में कई विधायकों ने अपने नए कुर्ते और सुलार तक तैयार करवा लिए थे, लेकिन अब वो इसे पहनने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ विधायकों ने तो यह भी मान लिया है कि इस साल तो मंत्रिमंडल विस्तार होना नामुमकिन है।
कांग्रेस ने ली चुटकी
मंत्रिमंडल में रिक्त पदों को भरने के मुद्दे पर कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा में गुटबाजी बढ़ गई है, जिससे विधायकों की हसरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री ने जा कर कई बार बैठकें कीं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। भाजपा संगठन भी मानता है कि मंत्रिमंडल विस्तार होना अनिवार्य है, खासकर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए।
अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री और भाजपा के हाईकमान पर टिकी हुई हैं। क्या चार साल पुरानी विधायकों की हसरतें अब पूरी हो पाएंगी, या फिर चार साल की मेहनत ख्याली पुलाव बनकर रह जाएगी?
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समीक्षा और टिप्पणी: इस लेख को लिखा है नेहा शर्मा, टीम इंडिया टुडे।
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