उत्तराखंड में अतिक्रमण पर 'नो टॉलरेंस': सीडीओ का अल्टीमेटम, प्रशासन की सख्ती चौकाने वाली
उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत पूरे प्रदेश में अवैध कब्जों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई…
उत्तराखंड में अतिक्रमण पर 'नो टॉलरेंस': सीडीओ का अल्टीमेटम, प्रशासन की सख्ती चौकाने वाली
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के आदेश पर, पूरे राज्य में अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है और कार्रवाई की जा रही है।
उत्तराखंड राज्य में सरकारी भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण की समस्या पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत, प्रशासन पूरे प्रदेश में अवैध कब्जों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। इसी संदर्भ में, हरिद्वार जिले के लक्सर तहसील में हाल ही में आयोजित तहसील दिवस के दौरान मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ललित नारायण मिश्र ने एक सख्त अल्टीमेटम दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण पर कोई भी सहानुभूति नहीं दिखाई जाएगी और इसे खत्म करने के लिए किसी भी प्रकार की सख्ती बरती जाएगी।
तहसील दिवस में CDO का सख्त संदेश
लक्सर तहसील में आयोजित तहसील दिवस में सीडीओ ललित नारायण मिश्र ने कहा, "जो लोग सरकारी भूमि पर बिना अनुमति के कब्जा कर बैठे हैं, उनकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह हमारा कर्तव्य है कि हम सरकारी जमीनों की सुरक्षा करें और किसी भी अवैध कब्जे को सहन नहीं करेंगे।" उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक क्षेत्र में अवैध कब्जों की गहन जांच होनी चाहिए।
प्रशासन की इस कार्रवाई का महत्व
इस तरह की सख्ती प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि आम जनता में भी एक संदेश भेजेगा कि प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति गंभीर है। यह दिशा-निर्देश अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बनेगा और अतिक्रमण की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक होगा।
आगामी कार्रवाई और योजनाएं
सीडीओ ने आश्वासन दिया कि हर जिले में एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसका मुख्य कार्य अवैध कब्जों की पहचान करना और उन पर कार्रवाई करना होगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए जीओ-टैगिंग और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक न केवल अवैध कब्जों को जल्दी से पहचानने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें सुलझाने में भी सहायता प्रदान करेगी।
लोकसभा और विधानसभा के चुनावों के मद्देनजर, यह कदम राजनीतिक दलों के बीच भी चर्चा का विषय है। लोगों को विश्वास दिलाने के लिए कि सरकारी जमीनें सुरक्षित हैं, प्रशासन ने इस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है।
निष्कर्ष
आखिरकार, प्रशासन की सख्ती अतिक्रमण के मामलों में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में अगर इसी तरह की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जाती हैं, तो यह न केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा में मददगार होगी, बल्कि समाज में कानून का सम्मान भी बढ़ाएगी।
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धन्यवाद,
टीम इंडिया टुडे, मानसी
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