उत्तराखंड में विधायक अरविंद पांडे ने DGP से मिलकर परिवार पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की
देहरादून: उत्तराखंड के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि हड़पने के आरोपों से जुड़े विवाद में सुर्खियों में हैं। उनके परिवार के सदस्यों (भाई देवानंद पांडे सहित अन्य रिश्तेदारों) पर बाजपुर पुलिस में धोखाधड़ी, धमकी और फर्जीवाड़े से जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज होने के बाद …
उत्तराखंड: भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने की पारिवारिक विवादों की सख्त जांच की मांग
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के भाजपा विधायक अरविंद पांडे भूमि हड़पने के आरोपों में फंसे हुए हैं। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
देहरादून: उत्तराखंड के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि हड़पने के आरोपों से घिरे हुए हैं। उनके परिवार के सदस्यों, जिनमें उनके भाई देवानंद पांडे भी शामिल हैं, पर बाजपुर पुलिस में फर्जीवाड़ा, धमकी और धोखाधड़ी से जमीन कब्जाने का मामला दर्ज किया गया है। इस विवाद के चलते विधायक ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
डीजीपी से मुलाकात
आज, विधायक अरविंद पांडे ने देहरादून में उत्तराखंड पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मामले की सख्त और निष्पक्ष जांच की अपील की। विधायक ने यह भी सुझाव दिया कि जिन पर मुकदमा दर्ज है, जिन्होंने शिकायत की है, और गवाहों का पॉलीग्राफ टेस्ट (लाइ डिटेक्टर) और नार्को टेस्ट कराया जाए।
सच्चाई सामने लाने का भरोसा
विधायक ने इस मामले में कहा, “इससे सच्चाई पूरी तरह सामने आ जाएगी। कौन सही है और कौन गलत, यह स्पष्ट हो जाएगा। यदि मैं या मेरा परिवार दोषी पाया जाता है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” उन्होंने जोर दिया कि जांच में किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं होना चाहिए और दोषियों को सजा और निर्दोषों को बरी किया जाना चाहिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह मामला तब आया है जब उत्तराखंड भाजपा में टिकट बंटवारे, गुटबाजी, और आंतरिक कलह की खबरें लगातार चल रही हैं। विधायक अरविंद पांडे, जो 2012 से गदरपुर से विधायक हैं और 2017-2022 तक कैबिनेट मंत्री रहे, आरएसएस से भी जुड़े हुए हैं। हाल के महीनों में, उनके खिलाफ कुछ अन्य विवाद भी सामने आए थे, जैसे कि कैंप ऑफिस पर अतिक्रमण का नोटिस, लेकिन वर्तमान भूमि विवाद सबसे चर्चित है। इसके चलते उनकी छवि को नुकसान भी हुआ है।
डीजीपी का आश्वासन
डीजीपी ने विधायक की मांग पर गंभीरता दिखाई है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट अदालत की अनुमति से ही संभव हैं और ये जांच को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। पुलिस के इस कदम से न्याय प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ा है।
इस विवाद के संभावित प्रभाव को देखते हुए यह समझना महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक नेता कैसे अपने विवादों का सामना करते हैं और जनता का विश्वास कैसे बनाए रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति पर नजरें बनी हुई हैं।
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आपकी जानकारी के लिए, यह खबर टीम इंडिया टुडे से रिया शर्मा द्वारा प्रदान की गई है।
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