उत्तराखंड: सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नया SOP जारी

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। यह SOP मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा 25 फरवरी 2026 को गृह अनुभाग-5 के माध्यम से सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, विभागाध्यक्षों और कार्यालयाध्यक्षों को जारी किया गया है। यह …

Feb 26, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड: सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नया SOP जारी
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक व्या

उत्तराखंड: सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नया SOP जारी

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है।

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से उठाने हेतु एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। इस SOP को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा 25 फरवरी 2026 को गृह अनुभाग-5 के माध्यम से सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, विभागाध्यक्षों और कार्यालयाध्यक्षों को निर्देशित करते हुए साझा किया गया। यह कदम खासकर सरकारी अधिकारियों पर हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है। इनमें से एक प्रमुख घटना प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौटियाल पर किया गया कथित हमला था, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुरक्षा दिशा-निर्देशों को विरासत में देने का निर्देश दिया था।

SOP का मुख्य उद्देश्य

इस SOP का प्रमुख उद्देश है सरकारी कार्यस्थलों पर लोक सेवकों को बाहरी आक्रामकता, हिंसा और अनावश्यक दबाव से सुरक्षित रखना। यह SOP उत्तराखंड राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों जैसे निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, खंड विकास कार्यालयों, शैक्षणिक तथा चिकित्सा संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि, यह अध्यक्ष सचिवालय और विधानसभा जैसी पहले से सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर लागू नहीं होगी।

प्रमुख प्रावधान

परिधि सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण:

  • सभी कर्मचारियों के लिए टेम्पर-प्रूफ आईडी कार्ड पहनना अनिवार्य किया गया है।
  • आम जनता के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा; केवल VIP या दिव्यांग वाहनों को अंडर-व्हीकल मिरर से जांच के बाद अनुमति प्राप्त होगी।
  • डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) के साथ-साथ फ्रिस्किंग तथा ब्लैक लिस्टेड व्यक्तियों के लिए “नो एंट्री” रजिस्टर भी अनिवार्य किया गया है।

आगंतुक प्रबंधन:

  • डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) या रजिस्टर में उच्च रिजॉल्यूशन फोटो, आधार/वोटर आईडी की सत्यापन की प्रक्रिया अनिवार्य है।
  • QR/RFID बैज जारी किए जाएंगे, जो केवल निर्दिष्ट क्षेत्रों तक सीमित होंगे।
  • वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने के लिए पूर्व अपॉइंटमेंट अत्यंत आवश्यक होगा, बिना अपॉइंटमेंट वाले आगंतुकों को प्रवेश द्वार से वापस भेज दिया जाएगा।

बैठक और जन-प्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल:

  • जन शिकायत सुनवाई के लिए विशेष समय निर्धारित किया जाएगा।
  • आम जनता के प्रतिनिधिमंडल में अधिकतम 2 व्यक्ति ही शामिल हो सकेंगे; 2 से अधिक होने पर कॉन्फ्रेंस रूम में बैठक होगी, जो CCTV द्वारा सुरक्षित होगी।
  • निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अधिकतम 3 व्यक्ति (प्रतिनिधि सहित) अनुरोध कर सकेंगे।
  • VIP के सशस्त्र सुरक्षा कर्मचारियों को हथियार रिसेप्शन पर दर्ज कराना होगा और प्रतीक्षालय में रहना होगा।

सुरक्षा अवसंरचना:

  • HD CCTV कैमरे (ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित) सभी प्रवेश द्वारों, गलियारों और अधिकारियों के कक्षों में लगेंगे; फुटेज को 3 महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा।
  • अधिकारियों की डेस्क और रिसेप्शन पर साइलेंट पैनिक अलार्म की व्यवस्था होगी।

घटना के बाद कार्रवाई:

  • घटनास्थल को सील कर देना होगा, जबकि CCTV फुटेज सुरक्षित उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
  • घायलों को मेडिको-लीगल केस में इलाज मुहैया कराया जाएगा।
  • भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के अंतर्गत FIR दर्ज की जाएगी; इसकी जांच इंस्पेक्टर स्तर पर की जाएगी और यह 2 महीने में पूरी होगी।
  • आगंतुकों के लिए दिशा-निर्देश (Do’s & Don’ts):
  • शिष्ट भाषा का प्रयोग आवश्यक होगा, शोर-शराबा या नारेबाजी की अनुमति नहीं होगी।
  • अधिकारी के कक्ष में एक समय में अधिकतम 2 व्यक्ति ही उपस्थित हो सकेंगे।
  • हथियार, लाठी, ज्वलनशील पदार्थ, स्याही आदि को लाना प्रतिबंधित रहेगा।
  • वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
  • दुर्व्यवहार के मामले में तत्काल FIR और निष्कासन की कार्रवाई होगी।

यह SOP सभी प्रमुख स्थानों पर चस्पा की जाएगी, जिसमें आचार संहिता, दंडात्मक कार्रवाई और संपर्क विवरण शामिल होंगे। विभागीय सचिव यदि आवश्यक समझें तो पंजीकृत एजेंसियों से सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर सकते हैं। उच्च जोखिम वाले कार्यालयों में वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी किए जाएंगे।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे इस SOP के अनुसार तत्काल सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर अनुशासन बना रहे। यह कदम सरकारी प्रणाली की गरिमा और कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा।

इस महत्वपूर्व विषय पर अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

सादर,
टीम इंडिया टुवडे, प्रियंका देवी

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