ऋषिकेश वन भूमि विवाद: स्थानीय महिलाओं का आक्रोश, वन विभाग की टीम को मिली चुनौती

रैबार डेस्क:  ऋषिकेश में पशुलोक समिति की वन भूमि के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के... The post ऋषिकेश वन भूमि विवाद, तारबाड़ करने पहुंची टीम को फिर झेलना पड़ा महिलाओं का आक्रोश appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jan 11, 2026 - 00:27
 61  501822
ऋषिकेश वन भूमि विवाद: स्थानीय महिलाओं का आक्रोश, वन विभाग की टीम को मिली चुनौती
रैबार डेस्क:  ऋषिकेश में पशुलोक समिति की वन भूमि के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के... The post ऋषिकेश वन भूमि व

ऋषिकेश वन भूमि विवाद: स्थानीय महिलाओं का आक्रोश, वन विभाग की टीम को मिली चुनौती

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday

कम शब्दों में कहें तो, ऋषिकेश में पशुलोक समिति की वन भूमि को लेकर जारी विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ा है जब वन विभाग की टीम ने स्थानीय महिलाओं के तीव्र विरोध का सामना किया।

रैबार डेस्क: ऋषिकेश में पशुलोक समिति की वन भूमि के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद से विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में, वन विभाग की टीम ने फिर से यहां तारबाड़ लगाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय महिलाओं ने इसका विरोध किया। इस स्थिति में वन विभाग की टीम निरुत्साहित नजर आई।

स्थानीय महिलाओं का संवेदनशील मुद्दा

शनिवार को, अमित ग्राम गली नंबर 25 में जब वन विभाग की टीम ने दलबल के साथ वन भूमि पर ताड़ के पेड़ लगाने की कोशिश की, तभी भूमियों से संबंधित लोग वहां पहुंचने लगे और विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारी महिलाएं धरने पर बैठ गईं और अपनी मांगें उठाने लगीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यह जमीन खरीदी है और पिछले पांच दशकों से यहां कृषि करते आ रहे हैं। उनका साफ संदेश था कि वे वन विभाग को इस भूमि पर कब्जा लेने की अनुमति नहीं देंगी।

प्रशासन की स्थिति

इस पूरे मामले पर एसडीओ अनिल रावत का कहना है कि एक दिन पहले जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सहयोग मांगा गया था। उन्हें बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की जा रही है, जिसमें किसी भी प्रकार का विरोध करना सही नहीं है। लेकिन बावजूद इसके, लोगों ने विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का महत्व

यह भी उल्लेखनीय है कि ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण की सुनवाई के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड वन विभाग को 5 जनवरी को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया दिया था। इससे पहले, 27 दिसंबर को वन विभाग की टीम के सर्वे के दौरान लोगों ने विरोध किया था, जिसमें 28 दिसंबर को प्रदर्शन और बढ़ गया। प्रदर्शकारियों ने न केवल रेल मार्ग अवरुद्ध किया बल्कि पुलिस पर पथराव भी किया। इस संबंध में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं।

संभावित समाधान

वास्तव में, यह मामला न केवल भूमि के अधिकारों का है बल्कि स्थानीय समुदाय के संवेदनाओं से भी जुड़ा है। यह जरूरी है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले और समुदाय के साथ संवाद स्थापित करे। इसके साथ ही, स्थानीय महिलाओं की चिंताओं का सम्मान करते हुए उचित समाधान खोजा जाना चाहिए, ताकि विवाद को सुलझाया जा सके।

अगर आप और भी जानकारी चाहते हैं और लगातार अपडेट पाना चाहते हैं, तो हमारे पोर्टल पर जरूर विजिट करें: India Twoday.

इस लेख को तैयार करने में योगदान दिया है संगमिता देवी ने, टीम इंडिया टुडे.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow