ऋषिकेश वन भूमि विवाद: स्थानीय लोगों का तीव्र विरोध, तारबाड़ निर्माण में रुकावट

ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद वन विभाग ने सर्वे में चिन्हित वन भूमि पर तारबाड़ लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन जैसे ही ये काम शुरू हुआ, विरोध भी तेजी से सामने आने लगा। फिलहाल विरोध के बढ़ते दबाव के कारण तारबाड़ का कार्य रोकना पड़ा। स्थानीय लोगों का दावा—दशकों से […] The post ऋषिकेश: नहीं थम रहा वन भूमि विवाद, तारबाड़ करने पहुंची टीम के खिलाफ स्थनीयों का विरोध प्रदर्शन first appeared on Vision 2020 News.

Jan 11, 2026 - 09:27
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ऋषिकेश वन भूमि विवाद: स्थानीय लोगों का तीव्र विरोध, तारबाड़ निर्माण में रुकावट
ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद वन विभाग ने सर्वे में चिन्हित वन भूमि पर तारबाड़ लगाने

ऋषिकेश वन भूमि विवाद: स्थानीय लोगों का तीव्र विरोध, तारबाड़ निर्माण में रुकावट

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कम शब्दों में कहें तो, ऋषिकेश में वन विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत शुरू किया गया तारबाड़ कार्य स्थानीय लोगों के तीव्र विरोध के कारण रोक दिया गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से इस भूमि पर खेती-किसानी की है और उनके अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ऋषिकेश: देवभूमि ऋषिकेश में वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार चिन्हित वन भूमि पर तारबाड़ लगाने का कार्य आरंभ कर दिया था। मगर, जैसे ही यह प्रक्रिया शुरू हुई, स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ने लगा। स्थानीय निवासियों ने इस कार्य के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके चलते कार्य को रोकना पड़ा।

स्थानीय लोगों का दावा—दशकों से कर रहे हैं खेती

विरोध कर रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भूमि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी है और यहाँ पिछले कई दशकों से खेती कर रहे हैं। उनके लिए यह भूमि केवल खेती नहीं, बल्कि उनकी पहचान और जीविका का अहम हिस्सा है। इसलिए, उनका कहना है कि वन विभाग का इस भूमि पर अधिकार स्थापित करना अन्याय है।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी आवाज उठाई। उन्होंने नारेबाजी करते हुए वन विभाग की कार्रवाई और सरकारी रवैये के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। जब तारबाड़ लगने का काम प्रारंभ हुआ, तो तत्काल इस विरोध का असर पड़ना शुरू हो गया, और काम को रोकना पड़ा।

प्रशासन का रुख–विरोध उचित नहीं

इस मामले पर एसडीओ अनिल रावत ने बताया कि प्रशासन ने एक दिन पहले जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी और सहयोग की अपील की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत हो रही है। हालांकि, स्थानीय लोग इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं।

अनिल रावत ने कहा, “न्यायालय के आदेश का पालन करना अनिवार्य है। हमें उम्मीद थी कि स्थानीय लोग सहयोग करेंगे, लेकिन स्थिति इसके उलट होती जा रही है।” प्रशासन के लिए स्थिति असामान्य होती जा रही है, और इस मामले में समाधान खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

स्थानीय आवाज़ें: अधिकारों के हनन की चिंता

स्थानीय निवासियों का मानना है कि सरकार उनके अधिकारों का हनन कर रही है। कई वर्षों से मेहनत करके जो उत्पादन वे कर रहे हैं, उसे अचानक खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। इस पर स्थानीय निवासी आशा रखते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा।

इसके अलावा, इस मामले में सामाजिक संगठनों ने भी हस्तक्षेप किया है। वे सरकारी अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि स्थानीय निवासियों के अधिकारों का सम्मान किया जाए और उनकी आजीविका को सुरक्षित करने के लिए कार्रवाई की जाए।

भविष्य में इस विवाद के हल के लिए जन प्रतिनिधियों और सरकार के बीच संवाद की आवश्यकता है। यदि मामला पूजा जाता है, तो न केवल स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि सामाजिक सद्भावना भी बनी रहेगी।

इस विवाद ने न केवल ऋषिकेश के स्थानीय निवासियों को प्रभावित किया है, बल्कि यह प्रदेश में अन्य वन भूमि विवादों पर भी एक गंभीर दृष्टिकोण पेश करता है। सभी को यह समझने की आवश्यकता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय अधिकारों का संतुलन महत्वपूर्ण है।

समाप्त में, यह स्थिति दर्शाती है कि यदि स्थानीय निवासियों के अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाएगा, तो यह केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि समग्र समाज में असंतोष और अराजकता की ओर ले जा सकता है। सभी पार्टियों को इस मुद्दे को संवेदनशीलता से देखना होगा।

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सोनल शर्मा, टीम इंडिया टुडय

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