कांग्रेस का निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग

देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून में प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सचिवालय तक मार्च निकाला और सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया। इस …

Sep 26, 2026 - 09:27
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कांग्रेस का निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग
देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर का

कांग्रेस का निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग

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कम शब्दों में कहें तो, कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून में निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग की गई।

देहरादून में, शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सचिवालय तक मार्च निकाला और वहाँ निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया। इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी दहन किया गया, जिसे राजनीतिक आरोपों का प्रतीक माना गया।

प्रदर्शन में शामिल नेता

प्रदर्शन में अनेक प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनमें प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल शामिल थे। कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा और अनुशासन समिति के अध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी भी प्रदर्शन में सक्रिय रूप से भाग लेते नजर आए।

मुख्य मांगें

कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ दोनों निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति को भी समाप्त करने, उनके पूर्व निर्णयों को निरस्त करने, और नए निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की तीव्र मांग की गई। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने निर्वाचन आयुक्तों की गिरफ्तारी की मांग भी की।

कांग्रेस का आरोप है कि हाल के दिनों में निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता साक्षियों की पुनरीक्षण प्रक्रिया, और चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने और आपत्तियों के निस्तारण को लेकर राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच चिंता बढ़ी है।

फार्म-7 पर आपत्ति

कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया है कि उत्तराखंड के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फार्म-7 दाखिल करने की शिकायतें आई हैं। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, कांग्रेस ने मांग की है कि ऐसे मामलों की जांच की जाए और यह सत्यापित किया जाए कि आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति वास्तविक रूप से संबंधित मतदाताओं और क्षेत्रों के साथ जुड़े हुए हैं या नहीं।

सूचनाओं की पारदर्शिता की आवश्यकता

कांग्रेस ने SIR के दौरान प्राप्त सभी फार्म-7 आवेदनों का विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही, असामान्य संख्या में फार्म-7 दाखिल करने वाले व्यक्तियों की जानकारी सार्वजनिक कर उनकी आपत्तियों की विशेष जांच कराने की भी मांग की गई है।

पार्टी ने यह भी कहा कि किसी योग्य मतदाता का नाम सिर्फ आपत्ति या फार्म-7 के आधार पर न हटाया जाए। नाम हटाने से पहले बीएलओ और ईआरओ स्तर पर वास्तविक सत्यापन और संबंधित मतदाता को सुनवाई का अवसर प्रदान करने की मांग भी उठाई गई है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस ने राष्ट्रपति के समक्ष निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी नौ प्रमुख मांगें पेश की हैं। इनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता, नाम हटाने से पहले निष्पक्ष जांच, राजनीतिक दलों के शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, तथा निर्वाचन प्रक्रिया में पक्षपात या दबाव की स्वतंत्र जांच शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, मतदाता सूची से संबंधित आंकड़ों और आपत्तियों के निस्तारण की जानकारी को सार्वजनिक करने, योग्य नागरिकों के नाम सुरक्षित रखने, और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

कांग्रेस ने कहा है कि लोकतंत्र में मतदाता के मत का सर्वोच्च महत्व है और मतदाता सूची की विश्वसनीयता सीधे चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़ी है। इसलिए, पार्टी ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर आवश्यक संवैधानिक और विधिक कार्रवाई की मांग की है।

इस प्रकार, कांग्रेस ने अपनी मांगों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है और यह समय की मांग है।

फिर भी, समिति ने यह भी कहा है कि चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने के लिए राजनीतिक संवाद और सहयोग की आवश्यकता है।

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सादर, टीम इंडिया टुडे

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