किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में कांग्रेस नेताओं की आगे बढ़ी पहल, न्यायिक जांच की मांग

रैबार डेस्क: उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मंगलवार को... The post किसान सुखवंत सिंह खुदकुशी मामला, मृतक के परिजनों से मिले कांग्रेस नेता, सरकार से की न्यायिक जांच की मांग appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jan 13, 2026 - 18:27
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किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में कांग्रेस नेताओं की आगे बढ़ी पहल, न्यायिक जांच की मांग
रैबार डेस्क: उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मंगलवार को

किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में कांग्रेस नेताओं की आगे बढ़ी पहल, न्यायिक जांच की मांग

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं ने किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले की न्यायिक जांच की मांग उठाई है। इस मामले में शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात की है।

रैबार डेस्क: उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मंगलवार को उधमसिंहनगर के ग्राम पैगा में जाकर मृतक किसान सुखवंत सिंह के परिजनों के साथ सांत्वना व्यक्त की और इस दुखद घटनाक्रम के सभी पहलुओं को समझने का प्रयास किया।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि किसान की आत्महत्या के पीछे के कारण वाकई में इंसानियत को झकझोर देने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था की स्थिति निरंतर बिगड़ती जा रही है, और सुखवंत सिंह की आत्महत्या यह दर्शाती है कि देश के किसानों को न्याय नहीं मिल रहा। गोदियाल ने स्पष्ट किया कि ये सिर्फ एक व्यक्ति की आत्महत्या की घटना नहीं है, बल्कि यह धामी सरकार और राज्य पुलिस के लिए एक गंभीर चुनौती है।

किसान सुखवंत सिंह

गणेश गोदियाल ने जोर देकर कहा कि सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक या मजिसिट्रियल जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कमिश्नर से कराई जा रही जांच पर विश्वास नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी एसएसपी को बख्शा जा रहा है। इस मामले में जिन पुलिस अधिकारियों पर आरोप है, उन पर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि एसएसपी को भी पद से तुरंत हटाया जाए ताकि जांच में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि पुलिसकर्मियों को निलंबित करना इस मामले का समाधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया है और साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से न्यायिक जांच कराई जाए। इसके अलावा, उन्होंने मांग की कि मृतक किसान के परिवार को जल्द से जल्द 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।

इस ट्रैजेडी ने किसानों के मुद्दों पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है और यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सरकार और पुलिस प्रशासन अपने प्राथमिक कर्तव्यों से चूक रहे हैं। क्या राज्य में ऐसे और भी मामले हमारी निगरानी से बाहर हैं? क्या सतर्कता के माध्यम से कृषि संकट के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?

कृषि संबंधित मुद्दों की इस गहराई को समझते हुए, यह आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन और सरकारी मशीनरी किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे और उन्हें पूरा करे। ऐसे मामलों में किसान संगठनों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जो किसानों की समस्याओं को उठाने और उनकी आवाज को मजबूत बनाने का कार्य करते हैं।

आखिरकार, यह समझना महत्वपूर्ण है कि कृषि केवल खाद्य उत्पादन का साधन नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की जीवनशैली और संस्कृति का हिस्सा है। किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और सरकार को इस संदर्भ में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

समाज के सभी वर्गों को इस विषय पर एकजुट होकर विचार करने की आवश्यकता है, ताकि सभी समस्या का समाधान संभव हो सके।

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टीम इंडिया टुडे, लेखिका: नीता शर्मा

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