“जब चीनी सेना ने मुझे हिरासत में लिया था” – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का 20 साल पुराना अनुभव

रैबार डेस्क: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह मे... The post ‘जब चीनी सेना ने हमें हिरासत में ले लिया था’…राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सुनाया 20 साल की उम्र का वो किस्सा appeared first on Uttarakhand Raibar.

Sep 20, 2026 - 00:27
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“जब चीनी सेना ने मुझे हिरासत में लिया था” – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का 20 साल पुराना अनुभव
रैबार डेस्क: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह मे

“जब चीनी सेना ने मुझे हिरासत में लिया था” – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का 20 साल पुराना अनुभव

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कम शब्दों में कहें तो: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने करियर में एक महत्वपूर्ण घटना का वर्णन किया, जब उनके साथी चीनी सेना द्वारा हिरासत में लिए गए थे।

रविवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में, प्रसिद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अपने 20 वर्ष की आयु में एक अनोखे अनुभव को साझा किया। उन्होंने दर्शकों को बताया कि कैसे एक युवा अधिकारी के तौर पर उनकी जिम्मेदारियों ने उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा, जब उनके सहयोगियों को चीनी सेना ने पकड़ लिया।

चीन-बॉर्डर पर सुरक्षा की जिम्मेदारी

डोभाल ने समारोह को संबोधित करते हुए यह भी बताया कि वह उस समय इंटेलिजेंस क्षेत्र में नए थे और उन्हें सिक्किम में तैनात किया गया था। उनकी जिम्मेदारी में बॉर्डर के क्षेत्रों की निगरानी करना और PLA (पॉलीवुड आर्मी) की गतिविधियों की जानकारी एकत्रित करना शामिल था। उन्होंने कहा, 'मेरी जिम्मेदारी में बॉर्डर वाले इलाकों की देखभाल करना और चीनी सेना की हरकतों की जानकारी इकट्ठा करना भी शामिल था।'

एक खुफिया मिशन का असफल संचालन

अजित डोभाल ने बताया कि एक ऑपरेशन के लिए उन्होंने अपने अधिकारियों को बॉर्डर पर भेजा था। 'उन्हें तो केवल पाँच या छह दिन में लौट आना था, लेकिन जब पांच दिन बीत गए और उनके लौटने का कोई संदेश नहीं आया, तब मेरी चिंता बढ़ने लगी। दस दिन और बीत गए, और फिर एक और दस दिन…' उन्होंने कहा।

उनकी चिंता बढ़ती जा रही थी, लेकिन उन्हें हेडक्वार्टर से कॉल आई, जिसमें बताया गया कि उनके सहयोगी चीनी हिरासत में हैं। 'शायद कोई बातचीत, नेगोशिएशन या डील हुई, जिसके कारण वे वापस आ गए,' उन्होंने कहा।

कठिनाई से सीखा गया पाठ

डोभाल ने इसे अपने करियर का अंत मान लिया था और सोचा कि उन्हें अब कोई और करियर खोजना पड़ेगा। लेकिन अंततः जांच पूरी होने के बाद, उन्हें बताया गया कि वे बिना किसी गलती के ही फैसले का सामना कर रहे हैं।

डोभाल ने एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा के शब्दों को साझा किया, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो का सदस्य था। उन्होंने कहा, 'यह सब मैप रीडिंग की बात है। जिंदगी केवल एक सवाल है। कुछ लोग अपनी मैप रीडिंग सही रखते हैं, जबकि अन्य गलत।'

छात्रों के लिए प्रेरणा

उन्होंने छात्रों को यह संदेश दिया कि करियर के कठिन दौर में किसी घटना को अंतिम क्षण मानना आवश्यक नहीं है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, ‘जिस घटना को मैंने कभी अपने करियर का अंत समझ लिया था, वह वास्तव में मेरी आगे की यात्रा को रोक नहीं सकी।' इस तरह के अनुभव विशिष्ट चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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सादर, टीम इंडिया ट्वोडे
प्रियंका शर्मा

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