ट्रक में ठूंसकर 78 मुस्लिमों को मार दिया था:थाईलैंड में अलग देश की मांग खत्म की, कौन है शिनवात्रा फैमिली, जिससे मिलेंगे मोदी

साल 2004 की बात है। थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से में अलग मुस्लिम देश ‘पट्टानी’ के लिए भारी प्रदर्शन हो रहे थे। मुस्लिम बहुल नरथिवात राज्य में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 6 लोगों को गिरफ्तार किया। 25 अक्टूबर को इनकी रिहाई के लिए 2000 से ज्यादा मुस्लिम एक पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हो गए। अलगाववादियों और पुलिस में टकराव तेज हुआ। तब पीएम रहे थाकसिन शिनवात्रा ने इसे सख्ती से कुचलने का आदेश दिया। पुलिस ने हजारों लोगों को जबरन पकड़कर, उन्हें निर्वस्त्र किया और उनके हाथ पीठ के पीछे बांध दिए। उन्हें 26 ट्रकों में ठूंसकर 150 किमी दूर एक आर्मी कैंप भेज दिया गया। 7 घंटे बाद जब उन्हें कैंप में उतारा गया तो इनमें से 78 की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। इस घटना से थाईलैंड सरकार की काफी आलोचना हुई। अलगाववादियों का समर्थन कर रहे मलेशिया ने भी इस पर नाराजगी जताई। लेकिन, इस घटना ने थाईलैंड की बौद्ध बहुल जनता के बीच थाकसिन को लोकप्रिय बना दिया। उन्हें लगा कि थाकसिन ही वो शख्स हैं जो देश को एकजुट रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इन्हीं थाकसिन की बेटी पाइतोंगतार्न शिनवात्रा थाईलैंड की पीएम हैं, जिनसे पीएम मोदी थाईलैंड की यात्रा के दौरान मुलाकात करेंगे। थाकसिन शिनवात्रा का परिवार देश में सबसे ताकतवर और प्रभावशाली है। पुलिस की नौकरी करने वाले थाकसिन शिनवात्रा इतने ताकतवर कैसे हुए, स्टोरी में जानेंगे… गृहयुद्ध से चीन की हालत खराब हुई तो परदादा थाईलैंड आए साल 1850 की बात है। चीन में होंग शिउचुआन नाम के एक शख्स ने बौद्ध धर्म के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। होंग खुद को ईसा मसीह का छोटा भाई बताता था। उसने किंग राजवंश के खिलाफ बगावत कर चीन के दक्षिणी इलाके को हड़पने की कोशिश की। इससे देश में भीषण गृहयुद्ध शुरू हो गया और इसमें 2 करोड़ लोग मारे गए। देश की हालत खराब हो चुकी थी। ऐसे में सेंग साएखु नाम के एक शख्स ने देश छोड़ दिया और सियाम चले आए। तब थाईलैंड को सियाम कहा जाता था। सेंग ने रेशम के कपड़े का बिजनेस शुरू किया और खूब तरक्की की। 1938 में साएखु परिवार ने थाई संस्कृति में घुलने-मिलने के लिए 'शिनवात्रा' टाइटल अपना लिया। थाकसिन साएखु परिवार के पांचवीं पीढ़ी के वंशज हैं। थाकसिन का जन्म 1949 में हुआ। थाकसिन के दादा चियांग साएखु परिवार के रेशम बिजनेस को और आगे ले गए और ‘शिनवात्रा सिल्क्स’ की स्थापना की। थाकसिन के पिता लोएट शिनवात्रा ने भी अपने फैमिली बिजनेस को और आगे बढ़ाया। साथ ही राजनीति से भी जुड़े। लोएट 1968 से 1976 तक सांसद भी रहे। इससे थाकसिन को कम उम्र में ही राजनीतिक पहचान मिल गई। पुलिस से बिजनेस में एंट्री, सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल थाकसिन ने 1973 में रॉयल थाई पुलिस में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे स्कॉलरशिप पर अमेरिका गए और वहां क्रिमिनल जस्टिस में मास्टर्स और डॉक्टरेट हासिल की। फिर वे थाईलैंड आए और पुलिस विभाग में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे। पुलिस में रहते हुए थाकसिन की मुलाकात पोटजमान नावादमरोंग से हुई और दोनों ने परिवार की रजामंदी से साल 1976 में शादी कर ली। थाकसिन की पत्नी बेहद अमीर घराने से थीं। उनकी नानी का संबंध राजपरिवार से था। कुछ साल पुलिस की नौकरी करने के बाद थाकसिन ने 1987 में पुलिस सर्विस से इस्तीफा दे दिया और टेलीकम्युनिकेशन बिजनेस से जुड़ गए। पुलिस में अच्छे पद पर रहे होने, ताकतवर परिवार का दामाद होने और पिता के राजनीति में होने का उन्होंने खूब फायदा उठाया। उनकी कंपनी शिन कॉर्पोरेशन अगले कुछ सालों में देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर बन गई। राजनीति में एंट्री लेते ही विदेश मंत्री बने थाकसिन पिता के राजनीति में होने की वजह से थाकसिन के अंदर राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पहले से ही मौजूद थीं। उन्होंने साल 1994 में राजनीति में एंट्री ली और पलंग धम्मा पार्टी (PDP) से जुड़े। इसी साल उन्हें थाईलैंड की गठबंधन सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया। हालांकि वे इस पद पर 3 महीने ही रह पाए और सरकार गिर गई। 1998 में उन्होंने अलग रास्ता अपनाते हुए थाई राक थाई (TRT) पार्टी की स्थापना की। TRT ने 2001 के चुनावों में लगभग आधी सीटें जीत लीं। थाकसिन थाईलैंड के 23वें प्रधानमंत्री बने। थाकसिन ने गरीबों व ग्रामीण लोगों के लिए सस्ता स्वास्थ्य, कर्ज और विकास योजनाएं शुरू कीं। ये लोग जो राजा को भगवान का अवतार मानते थे, वे अब थाकसिन के करीब आने लगे। इससे राजा के समर्थकों और एक बड़े संपन्न वर्ग को लगा कि थाकसिन की बढ़ती ताकत उनकी पारंपरिक सत्ता को चुनौती दे रही है। थाकसिन ने 2003 में ड्रग्स के खिलाफ सख्त मुहिम चलाई थी। इस मुहिम को वॉर ऑन ड्रग्स नाम दिया गया। सिर्फ 3 महीने में ड्रग्स कारोबार से जुड़े 2,500 से ज्यादा लोग मार दिए गए। इससे देश में ड्रग इंडस्ट्री की कमर टूट गई। अपराध कम हो गए। आम लोगों में थाकसिन बेहद लोकप्रिय हो गए, लेकिन मानवाधिकारों को लेकर उनकी आलोचना भी खूब हुई। मुस्लिमों के अलग देश की मांग को सख्ती से कुचला साल 2004 में दक्षिणी थाईलैंड में मुस्लिम अलगाववादी विद्रोह तेज हो गया था। वे कई दशकों से मुस्लिमों के लिए अलग ‘पट्टानी देश’ की मांग कर रहे थे। इसे पड़ोसी मुस्लिम बहुल देश मलेशिया का छुपा समर्थन मिल रहा था। इसी से जुड़े मामले में अलगाववादियों और पुलिस में टकराव हो गया। थाकसिन ने इसे सख्ती से कुचलने का आदेश दिया। एक ही दिन में 85 मुस्लिम अलगाववादियों की मौत हो गई। इसमें से 78 दम घुटने से मारे गए जबकि 7 की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना की वजह से थाकसिन सरकार की काफी आलोचना हुई। मलेशिया ने भी इस पर नाराजगी जताई, लेकिन बौद्ध बहुल जनता ने उनका समर्थन किया। उन्हें लगा कि थाकसिन देश को एकजुट और मजबूत रख सकते हैं और इसके लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस घटना के एक साल के बाद 2005 में थाईलैंड में आम चुनाव हुए जिसे शिनवात्रा ने आसानी से जीत लिया। शिनवात्रा की पार्टी ने 500 में से 377 सीटें जीतीं और वे दोबारा पीएम बने। इसी बीच

Apr 3, 2025 - 06:59
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ट्रक में ठूंसकर 78 मुस्लिमों को मार दिया था:थाईलैंड में अलग देश की मांग खत्म की, कौन है शिनवात्रा फैमिली, जिससे मिलेंगे मोदी
साल 2004 की बात है। थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से में अलग मुस्लिम देश ‘पट्टानी’ के लिए भारी प्रदर्शन हो

ट्रक में ठूंसकर 78 मुस्लिमों को मार दिया था: थाईलैंड में अलग देश की मांग खत्म की

थाईलैंड के दक्षिणी हिस्से में हाल ही में एक दर्दनाक घटना घटी, जिसमें 78 मुस्लिमों की जान ले ली गई। यह घटना देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रही है, जहां अलग देश की मांग को लेकर संघर्ष जारी था। अब, इस घटना की पृष्ठभूमि और इसके पीछे के कारणों को समझना आवश्यक है। News by indiatwoday.com

प्रमुख घटनाक्रम

इस क्रूर घटना में, आतंकवादी समूहों ने पहले आतंक फैलाया और फिर बेगुनाह मुसलमानों को ठिकाने लगा दिया। यह थाईलैंड के एक ऐसे इलाके में हुआ है, जहां दशकों से अलगाववादी आंदोलन जारी है। हालांकि, अब सरकार ने इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं और अलग देश की मांग को खत्म करने का निर्णय लिया है। इससे सामाजिक तनाव और संघर्ष में कमी आने की उम्मीद है।

शिनवात्रा फैमिली का महत्व

शिनवात्रा फैमिली थाईलैंड की राजनीति में एक प्रमुख नाम है। इस परिवार ने देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। मोदी के साथ उनकी मुलाकात के दौरान, उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए चर्चा करेंगे। एक मजबूत राजनीतिक परिवार होने के नाते, शिनवात्रा फैमिली ने जन समर्थन में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनाई है।

भारत और थाईलैंड के संबंध

भारत और थाईलैंड के बीच एक विशेष रिश्ता है जो सांस्कृतिक, आर्थिक, और व्यापारिक संबंधों पर आधारित है। शिनवात्रा परिवार मोदी से मिलने के अवसर पर, इस संबंध को और भी मजबूत बनाने की कोशिश करेगा। थाईलैंड के घटनाक्रम से भारत को भी सबक सीखने का अवसर मिल सकता है, जिससे वह अपने सुरक्षा और सामुदायिक एकता की दिशा में आगे बढ़ सके।

निष्कर्ष

इस घटना ने थाईलैंड में बरसों से चले आ रहे संघर्षों की गंभीरता को उजागर किया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और शिनवात्रा परिवार मिलकर एक स्थायी समाधान खोज पाते हैं। साथ ही, यह स्थिति भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बनकर उभरेगी। News by indiatwoday.com Keywords: थाईलैंड हमला, शिनवात्रा परिवार, मुस्लिमों की हत्या, मोदी शिनवात्रा मुलाकात, अलगाववादी आंदोलन थाईलैंड, सामाजिक तनाव, थाईलैंड भारत संबंध, कानूनी सुधार, दक्षिण थाईलैंड, थाईलैंड के राजनीतिक परिवर्तन.

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